शिक्षा और शक्ति

प्राचीन काल से ही भारतीय समाज में स्त्रियों को देवी का स्थान प्राप्त है फिर चाहें आदिशक्ति के रूप में या त्रेतायुग में देवी सीता, देवी गार्गी, द्वापरयुग में भी द्रौपदी को शिक्षा का समान अवसर प्राप्त हुआ है। सीता जी के मजबूत किरदार की वजह से ही बड़े निर्णय लेने में एक योद्धा की झलक दिखायी देती है, लंका में बंदी के रूप में अकेले रहते हुए भी कभी घबरायी नहीं, वरन रावण का डट कर सामना आज की स्त्री को संदेश देता है कि हमें सशक्त होना चाहिए अपने निर्णय लेने की क्षमता स्वयं भी होनी चाहिए। सीता जी ने हमेशा ही निर्णय स्वतन्त्र रूप से लिए फिर चाहे वह राम और लक्ष्मण के साथ वन जाने की बात हो या लक्ष्मण रेखा लाँघ कर एक भिक्षु को भिक्षा देने की बात, जबकि दोनों ही परिस्थितियों में उन्हें तात्कालिक होने वाली कठिनाईयों के विषय में ज्ञात था। वह सारी स्थितियों से पूर्णतया परिचित थी पर इन कठिन निर्णयों को लेने में उन्हें तनिक भी हिचकिचाहट न हुई। लक्ष्मण जी द्वारा खींची गयी रेखा एक पुरुष द्वारा तय की गयी सीमा थी परंतु धर्म के पालन हेतु उन्होंने उस रेखा को लांघा। रावण ने छलपूर्वक सीता जी का अपहरण तो कर लिया पर वह उन्हें पाने में असमर्थ रहा। अकेली होते हुए भी सीता जी को लंका में राक्षसों के बीच जरा भी भय न था, न रावण के अंदर इतना साहस था कि उन्हें उनकी मर्जी के बगैर छू भी सके। ऐसा इसलिए सम्भव था क्योंकि सीता जी शिक्षित थीं। उन्हें गुण दोष सबके विषय में भलीभाँति ज्ञान प्राप्त था। शिक्षा की लौ में उन्होंने अपने चरित्र को इतना मजबूत किया कि उन्हें स्वयं के निर्णय लेने में कभी कोई परेशानी न हुई।

अगर सीता के चरित्र को आज के परिवेश से जोड़ा जाए तो हम पाते हैं कि आज की नारी शिक्षित तो है पर अपने निर्णयों को लेने की उसे स्वतंत्रता नहीं है। महिला सशक्तिकरण, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की बातें तो हम बहुत करते हैं पर जब अधिकार देने की बात आती है तो पंक्ति में सबसे आखिर में नजर आते हैं। आज की महिला को, बेटी को, शिक्षित होने के साथ सशक्त होना पड़ेगा, तभी एक स्वस्थ समाज और स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण हो पायेगा। 

प्राचीन काल में सीता जैसे मजबूत चरित्र वाले बहुत से किरदार मिलेंगे। जरूरत है कि वर्तमान परिवेश में ऐसे किरदारों को पूर्ण अधिकार देने की जिससे वह स्वतः अपने निर्णय लेने में सक्षम हो स्वयं ही अपने मार्ग का चुनाव कर सफलता की और अग्रसर हो। आज की नारी भी उतनी ही मजबूत है जितनी की सीता थी। वह आज के समाज के रावण से उसी तरह अपने दम पर लड़ सकती है, आवश्यकता है तो उन्हें एक सही अवसर मिलने की। उनके ऊपर लोगों को विश्वास दिखाना होगा तभी वह निडर होकर आगे बढ़ेगी और आज के युग के रावणों का डट कर सामना कर पायेगी।

एक शिक्षित नारी दो कुलों को शिक्षित करती है।
यत्र पूज्यते नार्यन्तु, रमन्ते तत्र देवता।।

लेखिका
ज्योति कुमारी
इं0 अध्यापक
पूर्व माध्यमिक विद्यालय कोइलरा
विकास क्षेत्र -औराई,
जनपद -भदोही।

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