११५- मुकेश कुमार, प्रा० वि० लउआ, उझानी, बदायूँ

मित्रो आज हम आपका परिचय मिशन शिक्षण संवाद के माध्यम से जनपद- बदायूँ से बेसिक शिक्षा के अनमोल रत्न भाई मुकेश कुमार जी से करा रहे हैं। जिन्होंने हम सब को अपने कार्य के प्रति लगन से अपने लक्ष्य तक पहुँचने का सुगम और सरल मार्ग दिखाया है जिसे अपनी सकारात्मक सोच के साथ अपना कर अपने विद्यालय को सामाजिक विश्वास का विद्यालय बनाया है। जहाँ से एक भी बच्चा प्राइवेट स्कूल में पढ़ने नहीं जाता है। यदि हम सब भी चाह लें, तो राह ऊपर वाला अवश्य दिखाता है।. यही कारण है कि आज इस विद्यालय को ग्राम प्रधान से लेकर, पंचायत का प्रत्येक नागरिक अपना विद्यालय मानता है। 

आओ जानते हैं कि आपने ऐसा क्या किया कि बेसिक शिक्षा नकारात्मक व्यवस्था आपके मार्ग में व्यवधान नहीं बन सकी:---

मैं मुकेश कुमार
प्राथमिक विद्यालय लऊआ विकास क्षेत्र- उझानी बदायूं में सन् -२०१० से प्र०अ० का कार्य भार किया है इससे पहले स्कूल की स्थिति बहुत सोचनीय थी जब गाँंव के साथ अभिभावकों से बात की। कि हमें आप लोगों की सहायता व मदद की आवश्कता है क्योंकि हम इस  विद्यालय को एक मॉडल विद्यालय बनाना चाहते हैं हमें विद्यालय में बच्चों को पढ़ने की हर सुविधा से लैस करना है। इसमें गाँव के हर वर्ग का साथ चाहिए हमें सिर्फ बच्चे के भविष्य को लक्ष्य समझकर काम करना है। इस के लिए मैंने विद्यालय के होने वाले हर कार्य में गाँव  वालों का सहयोग लेना शुरू किया, विद्यालय की हर गति_विघि से अभिभावकों  को अवगत कराकर साथ में बैठककर बात करना शुरू किया।क्योंकि मैं भलीभांति जानता हूँ। विद्यालय एक ऐसी संस्था  है जहाँ बिना अभिभावकों के सहयोग के हम कुछ भी नहीं कर सकते हैं। इसके लिए मुझे काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा, लोगों को बार_बार समझाना पड़ा आैर उधर विद्यालय मैंने सुधार हेतु  विद्यालय साफ_सफाई , फुलवारी को लगाना प्रांगण को समतल बनाना और बच्चों के साथ अधिक मेहनत करना, बच्चों में हर गति_विधि कराना आदि। उधर शासन से जो भी जिस मद का धन आता, उस धन को अभिभावकों के साथ में विचार_विमर्श कर उस धन से बच्चों को पू्र्ण लाभ देना। अभिभावकों में भरोसा होने लगा कि मास्साव अब हर बात से अवगत कराते है जिससे उनमें अपनी जिम्मेदारी का अहसास होने लगा और जो बच्चे इधर_उधर पढ़ने जाते थे, वह हर बालक विद्यालय में आने लगा और आज कक्षा पाँच तक का कोई भी बालक बाहर पढ़ने नहीं जाता है। सब बच्चें सरकारी विद्यालय में अध्ययनरत हैं। मैं जानता है कि हर व्यक्ति बच्चे को एक अच्छी शिक्षा दिलाना चहता है। विद्यालय में  अध्ययनरत बच्चों को अपनी _अपनी जिम्मेदारी देकर बच्चों में एक विद्यालय के प्रति जिम्मेदारी का अहसास हैं विद्यालय की समस्त चावियॉ बच्चों के पास ही रहती है मैंने २०१० से आज तक अपने पास स्कूल की चावी नही रखी। मैं विद्यालय जब तक पहुंता हूँ तब तक बच्चे सारी व्यवस्था तैयार कर लेते है। आरम्भ में मुझे बच्चे के साथ में कार्य करना पड़ता था इन सब कार्य में मुझे लगभग दो वर्ष लगे तब जाकर बच्चो में जिम्मेदारी का अहसास दिला पाया। उधर अभिभावकों से लगातार सम्पर्क बनाए रखा ,तो कही जाकर आज सफल हुआ। आप इन फोटो से अनुमान लगा सकते है। और भी कार्य प्रस्तावित हैं जिन्हें पूर्ण करने है यह कार्य सब जन सहयोग से करने है। विद्यालय व्यवस्था अच्छी होने के कारण मु्स्कान योजना के अन्तगर्त विद्यालय फिल्म सूट की गई  है।
धन्यवाद!
मुकेश कुमार
जिला- बदायूँ

मित्रो आपने देखा कि किस प्रकार छोटे-छोटे प्रयास किसी विद्यालय को कहाँ तक पहुँचा सकते हैं बस जरूरत होती है कुछ करने की इच्छा शक्ति की, जो प्रायः बहानों के माध्यम से बचने का रास्ता तलाशती रहती है। जिस दिन शिक्षक अपने को केवल सरकारी नौकर की जगह राष्ट्र निर्माता शिक्षक की भूमिका में आ जायेगा, उसी दिन से बेसिक शिक्षा की, सबसे श्रेष्ठ शिक्षण संस्था के रूप में  गिनती शुरू हो जायेगी।

मिशन शिक्षण संवाद की ओर से ऐसे समर्पित कर्मयोगी और सहयोगी विद्यालय परिवार को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

👉मित्रो आप भी यदि बेसिक शिक्षा विभाग के सम्मानित शिक्षक हैं या शिक्षा को मनुष्य जीवन के लिए महत्वपूर्ण और अपना कर्तव्य मानते है तो इस मिशन संवाद के माध्यम से शिक्षा एवं शिक्षक के हित और सम्मान की रक्षा के लिए हाथ से हाथ मिला कर अभियान को सफल बनाने के लिए इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने में सहयोगी बनें और शिक्षक धर्म का पालन करें। हमें विश्वास है कि अगर आप लोग हाथ से हाथ मिलाकर संगठित रूप से आगे बढ़े तो निश्चित ही बेसिक शिक्षा से नकारात्मकता की अंधेरी रात का अन्त होकर रोशनी की नयी किरण के साथ नया सबेरा अवश्य आयेगा। इसलिए--

आओ हम सब हाथ मिलायें।
बेसिक शिक्षा का मान बढ़ायें।।

👉🏼नोटः- यदि आप या आपके आसपास कोई बेसिक शिक्षा का शिक्षक अच्छे कार्य कर शिक्षा एवं शिक्षक को सम्मानित स्थान दिलाने में सहयोग कर रहा है तो बिना किसी संकोच के अपने विद्यालय की उपलब्धियों और गतिविधियों को हम तक पहुँचाने में सहयोग करें। आपकी ये उपलब्धियाँ और गतिविधियाँ हजारों शिक्षकों के लिए नयी ऊर्जा और प्रेरणा का काम करेंगी। इसलिए बेसिक शिक्षा को सम्मानित स्थान दिलाने के लिए हम सब मिशन शिक्षण संवाद के माध्यम से जुड़कर एक दूसरे से सीखें और सिखायें। बेसिक शिक्षा की नकारात्मकता को दूर भगायें।

उपलब्धियों का विवरण और फोटो भेजने का WhatsApp no- 9458278429 है।

साभार: शिक्षण संवाद एवं गतिविधियाँ
 
विमल कुमार
कानपुर देहात
11/01/2017

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