194/2026, बाल कहानी- 04 नवम्बर
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 194/2026 *04 नवम्बर 26 (बुधवार)* #बाल_कहानी - #रामलीला_का_बन्दर ------------------------ पन्द्रह अगस्त के दो-तीन दिन बाद से ही रोहित को रोज बाजार के पल्ले छोर से नीचे बने पंचायत भवन में रात को गाने व बजाने की मधुर ध्वनि सुनाई देने लगी। कुछ दिन तक तो वह समझा कि कोई भजन- कीर्तन कार्यक्रम चल रहा होगा लेकिन जब लगातार देर रात तक हफ्ते भर से अधिक समय होने के बाद भी आवाजें आती रहीं तो उससे रहा नहीं गया। आखिर क्या हो रहा है वहाँ? जानने को उसका बाल मन विचलित हो उठा। और एक शाम वह बिना माता- पिता को बताए वहाँ चला ही गया और चुपके से पंचायत घर के उस कमरे के कोने में बैठ गया जहाँ गाना-बजाना व एक्टिंग का अभ्यास चल रहा था। सुदूर नेपाल के दूरस्थ गाँव में जन्मा लगभग आठ-नौ वर्षीय रोहित पहली बार अपने अभिभावकों के साथ भारत आया था और उनके साथ इस नगर में रहने लगा था। उसके माता-पिता यहाँ दिनभर मजदूरी करते और उसे निकट के ही विद्यालय में पढ़ने भेजते। एकाएक एक नये माहौल में आने तथा उसे समझने में उसे समय लग रहा था लेकिन वह धीरे- धीरे सब अपने बाल मन के अनुकूल ...