105/2026, बाल कहानी- 04 जुलाई
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 105/2026 *04 जुलाई 2026 (शनिवार)* #बाल_कहानी- #अन्न_का_सम्मान ------------------------ बहुत समय पहले की बात है- एक गाँव में एक किसान परिवार रहता था। परिवार मेहनती था, लेकिन घर के छोटे बेटे रोहित की एक आदत बहुत खराब थी। वह खाने की प्लेट में हमेशा खाना छोड़ देता था। माँ उसे बार-बार समझाती, “बेटा! अन्न को व्यर्थ मत करो, इसमें किसी का पसीना और भगवान का आशीर्वाद होता है।” लेकिन रोहित पर बात का असर नहीं होता था। एक बार गाँव में भयंकर सूखा पड़ा। खेत सूख गए, अनाज की पैदावार कम हो गई। घर में भी अन्न की कमी होने लगी। अब रोहित को पहली बार भूख का असली अर्थ समझ में आया। उस दिन माँ ने उसे सिर्फ एक छोटी रोटी दी। रोहित ने जल्दी-जल्दी खाना शुरू किया, लेकिन आधी रोटी छोड़ दी। माँ ने कुछ नहीं कहा, बस चुपचाप उसे देखती रहीं। रात को रोहित को एक सपना आया। उसने देखा कि एक वृद्ध किसान उसके सामने खड़ा है और कह रहा है, “जिस अन्न को तुम फेंकते थे, वही किसी भूखे की जान बचा सकता था।” सुबह रोहित की आँख खुली तो वह बेचैन था। उसने माँ से कहा, “माँ! अब मैं एक भी दाना बर्बाद नहीं करूँगा।”...