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मैं पेड़ नहीं लगाऊँगा

पिता

कहाँ तुम चले गए

गर्मी का मौसम

यही उसकी नियति है

आओ चुन्नू मुन्नू आओ

बेटी

कोई कजरी प्यासी न रहे

पानी की हर बूँद बचाओ

हे प्रभु हमको दो वरदान

आओ बच्चों हम सब सीखें

चिंटू का अनोखा तोहफा

तेरे किस रूप को नमन करूँ

उत्साह जगाया है

थोड़ा सा मुस्कराइए

हम तुमको शीश नवाते हैं

मुट्ठी भर वक़्त अधिक ले आना

तू मुझको इतनी मजबूर नहीं लगती

अंतर्मन की आवाज

एक फ़ौजी का पत्र

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