नन्हें मुन्नों को समर्पित यह दीपावली
नन्हें मुन्नों को समर्पित यह दीपावली,,,,
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"हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।"
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प्राथमिक विद्यालयों और अध्यापकों की नकारात्मक छवि जिस तरह आम जनमानस में व्याप्त हो चुकी है उसे तत्काल बदल पाना तो मुमकिन नहीं है लेकिन अगर सच्चे मन से ठान लिया जाय तो हम जल्द ही शिक्षक गरिमा और अस्मिता को पुनः प्राप्त करने में अवश्य सफल होंगे,,,बदलाव की बयार निःसन्देह हमारे शिक्षक साथियों के प्रयासों से प्रारम्भ हो चुकी है किंतु लम्बा सफर अभी भी बाकी है,,,इस बार दीपावली मेरे लिए वाकई अविस्मरणीय और अद्भुद रहेगी क्योंकि ग्रामीण परिवेश के जिन नौनिहालों के भविष्य निर्माण हेतु ईश्वर ने मुझे एक शिक्षक होने का गौरव प्रदान किया था उसमें मैं स्वयं को काफी हद तक सफल मानता हूँ,,,अभाव और आजीविका से जूझता ग्रामीण परिवेश का अभिभावक पूरी आशा और विश्वास के साथ अपने बच्चों का भविष्य आपके हाथों सँवरने की ललक पाले रहता है,,कमर तोड़ मेहनत और अभावों से भरा जीवन व्यतीत करता वह अभिभावक ईश्वर से यही प्रार्थना करता है कि उसके बच्चों को यह अभावग्रस्त जीवन ना व्यतीत करना पड़े तथा वह अच्छी शिक्षा प्राप्त कर शहरी परिवेश/समुदाय अथवा सम्पन्न वर्ग के बच्चों की तरह अपना सुखद भविष्य बना सकें,,,,ईश्वर की प्रार्थना के लिए उठे उसके हाथ निःसन्देह ईश्वर प्रतिमा के सम्मुख उठते हैं किंतु इसका सम्पूर्ण दायित्व कहीं ना कहीं हम शिक्षकों पर आन पड़ता है,,,दीपावली के इस पावन पर्व पर मैं ईश्वर को धन्यवाद देता हूँ की उन्होंने मुझे किसी पावन यज्ञ समिधा समान पुनीत कार्य सौंपा और एक शिक्षक होने का गौरव प्रदान किया,,,ये नौनिहाल बच्चे मेरे अन्नदाता हैं क्योंकि इनके भविष्य निर्माण की आधारशिला रखने जैसा पुनीत कार्य करके ही मैं स्वयं तथा अपने परिवार के भरण पोषण हेतु आजीविका प्राप्त करता हूँ,,,मैं परम पिता परमेश्वर से प्रार्थना करता हूँ की वे सदैव मुझे कर्मपथ पर अग्रसर रखते हुए समस्त नकारात्मक विचारों और अवरोधों से लड़ने की क्षमता प्रदान करें तथा इतना सामर्थ्य प्रदान करें की मैं अपने शिक्षक साथियों के साथ मिलकर इस बदलाव की बयार का एक हिस्सा बन सकूँ,,,
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सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
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धन्यवाद।
सभी शिक्षक साथियों को दीपावली की बहुत-बहुत बधाई के साथ,,,
जय हिंद-जय भारत-जय शिक्षक समाज
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संतोष प्रजापति
(स0अ0)
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"हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।"
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प्राथमिक विद्यालयों और अध्यापकों की नकारात्मक छवि जिस तरह आम जनमानस में व्याप्त हो चुकी है उसे तत्काल बदल पाना तो मुमकिन नहीं है लेकिन अगर सच्चे मन से ठान लिया जाय तो हम जल्द ही शिक्षक गरिमा और अस्मिता को पुनः प्राप्त करने में अवश्य सफल होंगे,,,बदलाव की बयार निःसन्देह हमारे शिक्षक साथियों के प्रयासों से प्रारम्भ हो चुकी है किंतु लम्बा सफर अभी भी बाकी है,,,इस बार दीपावली मेरे लिए वाकई अविस्मरणीय और अद्भुद रहेगी क्योंकि ग्रामीण परिवेश के जिन नौनिहालों के भविष्य निर्माण हेतु ईश्वर ने मुझे एक शिक्षक होने का गौरव प्रदान किया था उसमें मैं स्वयं को काफी हद तक सफल मानता हूँ,,,अभाव और आजीविका से जूझता ग्रामीण परिवेश का अभिभावक पूरी आशा और विश्वास के साथ अपने बच्चों का भविष्य आपके हाथों सँवरने की ललक पाले रहता है,,कमर तोड़ मेहनत और अभावों से भरा जीवन व्यतीत करता वह अभिभावक ईश्वर से यही प्रार्थना करता है कि उसके बच्चों को यह अभावग्रस्त जीवन ना व्यतीत करना पड़े तथा वह अच्छी शिक्षा प्राप्त कर शहरी परिवेश/समुदाय अथवा सम्पन्न वर्ग के बच्चों की तरह अपना सुखद भविष्य बना सकें,,,,ईश्वर की प्रार्थना के लिए उठे उसके हाथ निःसन्देह ईश्वर प्रतिमा के सम्मुख उठते हैं किंतु इसका सम्पूर्ण दायित्व कहीं ना कहीं हम शिक्षकों पर आन पड़ता है,,,दीपावली के इस पावन पर्व पर मैं ईश्वर को धन्यवाद देता हूँ की उन्होंने मुझे किसी पावन यज्ञ समिधा समान पुनीत कार्य सौंपा और एक शिक्षक होने का गौरव प्रदान किया,,,ये नौनिहाल बच्चे मेरे अन्नदाता हैं क्योंकि इनके भविष्य निर्माण की आधारशिला रखने जैसा पुनीत कार्य करके ही मैं स्वयं तथा अपने परिवार के भरण पोषण हेतु आजीविका प्राप्त करता हूँ,,,मैं परम पिता परमेश्वर से प्रार्थना करता हूँ की वे सदैव मुझे कर्मपथ पर अग्रसर रखते हुए समस्त नकारात्मक विचारों और अवरोधों से लड़ने की क्षमता प्रदान करें तथा इतना सामर्थ्य प्रदान करें की मैं अपने शिक्षक साथियों के साथ मिलकर इस बदलाव की बयार का एक हिस्सा बन सकूँ,,,
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सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
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धन्यवाद।
सभी शिक्षक साथियों को दीपावली की बहुत-बहुत बधाई के साथ,,,
जय हिंद-जय भारत-जय शिक्षक समाज
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संतोष प्रजापति
(स0अ0)
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