शिक्षक दिवस

सुनो-सुनो आज पाँच सितंबर की घड़ी आई।
तरह-तरह की खुशियाँ विद्यालयों में लाई।।

1) शेखूपुर की मैं शिक्षिका, आयुषी है नाम मेरा।
प्रस्तुत कविता मेरे शब्दों में, सबको है प्रणाम मेरा।।

 2) बेसिक हर जन के सपनों का बगीचा।
जिसे सभी शिक्षकों ने मिलकर सींचा।।

3) यहाँ गली-गली हैं सुंदर प्यारे से स्कूल।
जहाँ खिले हैं बच्चे रूपी नन्हें-नन्हें फूल।।

4) हर अध्यापक समय पर आता।
अपनी कर्मठता का परिचय दिखलाता।।

5) फिर आती है प्रार्थना की बेला।
प्रार्थना, राष्ट्रगान से हुआ सवेरा।।

6) फिर आई योगा की बारी।
जिससे दूर भागे बच्चों की बीमारी।।

7) साफ सफाई का पाठ पढ़ाया।
स्वस्थ बनकर रहना उन्हें सिखाया।।

8) फिर कक्ष की ओर बच्चे बढ़े  बारी-बारी।
अध्यापक ने भी शुरू कर दी पढ़ाने की तैयारी।।

9) किसी को पढ़ाये उर्दू, किसी को पढ़ाये गुरुजी संस्कृत।
इस तरह विभिन्न विधाओं से, बच्चों को करे अलंकृत।।

10) बीत समय के साथ, मध्यान्ह भोजन की बेला आई।
तरह-तरह के पकवानों की सुगंध बच्चों के मन को भाई।।

11) कभी दूध कभी केला तो कभी बँटे मिठाई।
कृमि मुक्ति गोलियाँ खिलाकर कीड़ों की करे पिटाई।।

12) बस्ता, जूता, बैग मिल गये, खुश-खुशहाली छाई।
तब झटपट किताबे पढ़ने में, बच्चों ने न देर लगाई।।

13) अध्यापकों ने टी०एल०एम० के माध्यम से यूँ पढ़ाया।
सारा टाॅपिक क्लियर हो गया, पाठ समझ में आया।।

14) कुछ ग्रुपों मे बच्चों को सर ने गतिविधि हेतु छाँट लिया।
विभिन्न वस्तुओं को उन्होंने आपस मे बाँट लिया।।

15) पूरे दिन का समय सुहाना, जाने कैसे बीत गया।
फिर मिलने का वादा करके, कल तक का सबने ब्रेक लिया।।

16) मुझको यकीन है ऐसे कर्मठ साथियों की कर्मठता रंंग दिखाएगी।
वो जो इक सपना मिलकर देखा है, उसमें ऊँचाईयाँ पाएगी।।
   
रचयिता
आयुषी अग्रवाल,
सहायक अध्यापक,

  • कम्पोजिट विद्यालय शेखूपुर खास,

विकास खण्ड-कुन्दरकी,
जनपद-मुरादाबाद।

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