चलो बचाएँ जल

सुरक्षित करें अपना कल..
अगर हम चाहें पानी दे नल..

तो फिर बचाएँ जल..
अगर हम चाहें खेत में हो फसल..

पेड़ों पर लगें अच्छे फल..
सुबह सुनाई दे पक्षियों के कोलाहल..

तो फिर बचाएँ जल..
चाह रहे दुनिया में न हो हलचल..

सुरक्षित रहे हमारा कल..
तो फिर बचाएँ जल..

रचयिता
शिराज़ अहमद,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय ददरा,          
विकास खण्ड-मड़ियाहूं,
जनपद-जौनपुर।

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