शिक्षक दिवस

आज जाना कि. ...
जरूरी है तेरी हर डाँट ..
थोड़ी बेरूखी थोड़ा एतराज..
मंजिलें यूँ ही नहीं मिलती हैं...
यूँ ही नहीं सजते हैं ...
जीत के जगमग ताज ..
आज जाना कि
जरूरी है कि पत्थर हो जमीं..
ठोकरें याद दिलाएँ कि ...
जाना है हमको भी कहीं...
थक के जो बैठ जाएँगे..
टीस जख्मों के जगाएँगे हमें. .
तेरी हर डाँट...
चलना ही सिखाएगी हमें....

रचयिता
शीला सिंह,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय विशेश्वरगंज,
नगर क्षेत्र-गाजीपुर,
जनपद-गाजीपुर।

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