हे शिक्षक वंदन नमन हमारा

जन मन में दीप जलाकर,
करते    हो    उजियारा।
स्वीकारो हे शिक्षक मेरे,
वंदन   नमन   हमारा।

सबको  है संदेश हमारा,
बनो   ज्योति की धारा।
बन   दीपक चन्दा तारे,
दूर   करो  तम   सारा।

सम्मान जगत है करता,
आशाएँ  मन में रखता।
अज्ञान मिटा दो  सारा,
हो  दिव्यज्ञान उजियारा।

जब जागे परिवर्तन आया,
मानव  जीवन  मुस्काया।
तुमने  नव पथ दिखलाया,
वह   शाश्वत बोध कराया।

अब भावी पथ दिखलाओ,
आलोक  प्रभा वह लाओ।
जब होती है तम की धारा,
आता बन चाणक्य हमारा।

अब जागो मेरे हे!  शिक्षक,
तुम  मानवता के संरक्षक।
बन नवल ज्ञान की  धारा,
फैला दो प्रकाश अब न्यारा।

नूतन नव बिम्ब बनाओ,
अभिनय  चित्र सजाओ।
हर ओर  दृश्य हो प्यारा,
भर दो  शुभ उजियारा।

अतिमानस  आज उतारो,
ये भारत  भूमि  सँवारो।
विश्व वंद्य हो जाए भारत,
ये अभिनव अपना भारत।

अन्वेषण के सूत्र बताओ,
सृजन नव्य कर जाओ।
यह भारत  भूमि हमारी,
देखे   राह     तुम्हारी।

टूटेगी जब तम की   कारा,
होगा शाश्वत   उजियारा।
हर शिक्षक श्रद्धेय हमारा,
स्वीकारो   नमन हमारा।

रचयिता
सतीश चन्द्र "कौशिक"
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय अकबापुर,
विकास क्षेत्र-पहला, 
जनपद -सीतापुर।

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