हम अध्यापक हैं
बहुत बड़ी है जिम्मेदारी,
जो हमको निभानी है,
नन्हें पौधों की जीवन बगिया में,
फूलों की सेज बिछानी है।
आदर्शों पर स्वयं चलकर,
सही राह दर्शानी है,
कोशिश करनी है जी तोड़,
व्यर्थ ना घड़ी बितानी है।
भविष्य गढ़ने को सुन्दर सा,
नित नयी जुगत भिड़ानी है,
हमसे ही तो सीखेंगे ये,
जीवन की कला सिखानी है।
यह व्यवसाय नही है एक मिशन है,
जिसके लक्ष्य अति व्यापक है,
नित सीखना होगा हमें कुछ नया,
क्योंकि हम अध्यापक हैं।।
रचयिता
दीप्ति खुराना,
सहायक अध्यापक,
जूनियर कम्पोजिट विद्यालय पंडिया,
विकास खण्ड-कुन्दरकी,
जनपद-मुरादाबाद।
जो हमको निभानी है,
नन्हें पौधों की जीवन बगिया में,
फूलों की सेज बिछानी है।
आदर्शों पर स्वयं चलकर,
सही राह दर्शानी है,
कोशिश करनी है जी तोड़,
व्यर्थ ना घड़ी बितानी है।
भविष्य गढ़ने को सुन्दर सा,
नित नयी जुगत भिड़ानी है,
हमसे ही तो सीखेंगे ये,
जीवन की कला सिखानी है।
यह व्यवसाय नही है एक मिशन है,
जिसके लक्ष्य अति व्यापक है,
नित सीखना होगा हमें कुछ नया,
क्योंकि हम अध्यापक हैं।।
रचयिता
दीप्ति खुराना,
सहायक अध्यापक,
जूनियर कम्पोजिट विद्यालय पंडिया,
विकास खण्ड-कुन्दरकी,
जनपद-मुरादाबाद।

बहुत सुन्दर रचना
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यवाद मैम🌺
Deleteये बात सब टीचरर्स समझ जाएं तो हमारे सरकारी विद्यालयों की अलग ही बात हो।
ReplyDeleteधन्य है आप जैसे शिक्षक