गणेश स्तुति
लम्बोदर गणराज गजानन,
पूरन कर दो आस गजानन।
अरुण तिलक मस्तक पर साजे,
हस्तपाश अरु परशु विराजे।
तुम ही भक्तन के रखलाले,
तुम हीं विघ्नन के टारे।
तुम पर है विश्वास गजानन,
पूरन कर दो आस गजानन।।
तुम गौरी के प्राण पियारे,
शंकर के नयनन के तारे।
विघ्न विनाशक मंगल कर्ता,
मोदक प्रिय विघ्नों के हर्ता।
रच दो फिर मधुमास गजानन।
पूरन कर दो आस गजानन।।
सबसे पहले होवे पूजन,
तुम गौरीशंकर के नंदन।
वक्रतुंड हो महाकाय तुम,
हर क्षण संतों के सहाय तुम,
भर दो नव्य प्रकाश गजानन।
पूरन कर दो आस गजानन।।
पूरन कर दो आस गजानन।
अरुण तिलक मस्तक पर साजे,
हस्तपाश अरु परशु विराजे।
तुम ही भक्तन के रखलाले,
तुम हीं विघ्नन के टारे।
तुम पर है विश्वास गजानन,
पूरन कर दो आस गजानन।।
तुम गौरी के प्राण पियारे,
शंकर के नयनन के तारे।
विघ्न विनाशक मंगल कर्ता,
मोदक प्रिय विघ्नों के हर्ता।
रच दो फिर मधुमास गजानन।
पूरन कर दो आस गजानन।।
सबसे पहले होवे पूजन,
तुम गौरीशंकर के नंदन।
वक्रतुंड हो महाकाय तुम,
हर क्षण संतों के सहाय तुम,
भर दो नव्य प्रकाश गजानन।
पूरन कर दो आस गजानन।।
रचयिता
डॉ0 प्रवीणा दीक्षित,
हिन्दी शिक्षिका,
के.जी.बी.वी. नगर क्षेत्र,

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