बाढ़
जब होती तेज बारिश नाले और नदियाँ होती उफ़ान पर,
रौद्र रूप धारण कर पानी ढहाता कहर सब पर।
यह नहीं देखता कौन है अमीर और कौन है गरीब,
सबको अपने में समेट लेती है जो भी आता है करीब।
होती है इतनी मनचली किसी की भी नहीं सुनती है,
रोकने की कोई हिमाकत नहीं करता क्योंकि यह नहीं रुकती है।
जब बाढ़ आती है तो बहुत कुछ नुकसान होता है,
फसलें तबाह हो जाती हैं किसान सिर पकड़कर रोता है।
पेड़ -पौधे और कच्चे मकान गिर जाते हैं,
सड़कें टूट जाती हैं और पुल बह जाते हैं।
बाढ़ आने पर निचले हिस्से के लोग टीले या ऊँची जगहों पर चले जाते हैं,
बाढ़ पीड़ित के पास कुछ नहीं होता है जो मिलती मदद उसी से गुजारा करते हैं।
बच्चे कहाँ खेलें सब जगह तो पानी ही होता है,
बाढ़ पीड़ित हर व्यक्ति एकटक अपने डूबे खेत और घर को देखता है।
वह चाहकर भी नहीं कुछ कर पाता है,
बस बाढ़ का पानी कम हो यही ईश्वर से दुआ करता है।
बाढ़ से नुकसान के साथ कुछेक फायदे भी होते हैं,
नल पानी बड़ी आसानी से देते हैं।
जितने क्षेत्रफल में बाढ़ आती है,
वहाँ की जमीन उपजाऊ हो जाती है।
बाढ़ जब आती है, तो सबको रुला जाती है,
अगले साल जब बारिश होती है बाढ़ की याद ताज़ा हो जाती है।
रचयिता
शिराज़ अहमद,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय ददरा,
विकास खण्ड-मड़ियाहूं,
जनपद-जौनपुर।
रौद्र रूप धारण कर पानी ढहाता कहर सब पर।
यह नहीं देखता कौन है अमीर और कौन है गरीब,
सबको अपने में समेट लेती है जो भी आता है करीब।
होती है इतनी मनचली किसी की भी नहीं सुनती है,
रोकने की कोई हिमाकत नहीं करता क्योंकि यह नहीं रुकती है।
जब बाढ़ आती है तो बहुत कुछ नुकसान होता है,
फसलें तबाह हो जाती हैं किसान सिर पकड़कर रोता है।
पेड़ -पौधे और कच्चे मकान गिर जाते हैं,
सड़कें टूट जाती हैं और पुल बह जाते हैं।
बाढ़ आने पर निचले हिस्से के लोग टीले या ऊँची जगहों पर चले जाते हैं,
बाढ़ पीड़ित के पास कुछ नहीं होता है जो मिलती मदद उसी से गुजारा करते हैं।
बच्चे कहाँ खेलें सब जगह तो पानी ही होता है,
बाढ़ पीड़ित हर व्यक्ति एकटक अपने डूबे खेत और घर को देखता है।
वह चाहकर भी नहीं कुछ कर पाता है,
बस बाढ़ का पानी कम हो यही ईश्वर से दुआ करता है।
बाढ़ से नुकसान के साथ कुछेक फायदे भी होते हैं,
नल पानी बड़ी आसानी से देते हैं।
जितने क्षेत्रफल में बाढ़ आती है,
वहाँ की जमीन उपजाऊ हो जाती है।
बाढ़ जब आती है, तो सबको रुला जाती है,
अगले साल जब बारिश होती है बाढ़ की याद ताज़ा हो जाती है।
रचयिता
शिराज़ अहमद,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय ददरा,
विकास खण्ड-मड़ियाहूं,
जनपद-जौनपुर।

Nice
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