एक बला बन गयी है प्लास्टिक

जीवन के लिए बहुत ज़रूरी
लगने लगी है प्लास्टिक
एक बला बन गयी है प्लास्टिक
कल सुविधा के लिए
हुआ था इसका इज़ाद 
आज दुविधा  बन
कहर बरपा रही है प्लास्टिक।
विनाश  का वायरस  बनकर
सामने आ रही है प्लास्टिक
हमारे मुँह का निवाला  छीन
भूमि की उर्वरता को खा रही है प्लास्टिक।
जीवों  पर लेश  मात्र भी
दया नहीं करती है प्लास्टिक
ज़िंदगी के लिए अभिशाप
बन गयी है प्लास्टिक।
 रीसाइकिल नहीं करने
देती है ये प्लास्टिक
देश ही नहीं विदेशों  को भी
धूल चटा रही है प्लास्टिक।
थैला भूले  हुई कमज़ोर याददाश्त  हर चीज़  ले आती है प्लास्टिक
चुनौतियों को पैदा कर
ख़तरे को दावत दे रही है प्लास्टिक।
मानव स्वास्थ्य के लिए
होती है   घातक प्लास्टिक
खुद तो जीवित रहती है हज़ारों साल
दूसरों को मौत की नींद सुला  रही है प्लास्टिक।
चाहे जलाओ, चाहे दफनाओ 
दानव सा मुस्कुराती  है प्लास्टिक
पर्यावरण के लिए मुसीबत
बनती जा रही है प्लास्टिक।
समस्या ही समस्या है
नहीं समाधान है प्लास्टिक
मानव जीवन में
विष घोल  रही है प्लास्टिक।
अब नहीं तो कब
बंद करोगे  लेना प्लास्टिक
हो जाओ सतर्क नहीं तो
गम्भीर परिणाम देगी प्लास्टिक।

रचनाकार
रुखसाना बानो,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक कन्या विद्यालय अहरौरा,
विकास खण्ड-जमालपुर,
जनपद-मीरजापुर।

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