जय माता दी

हे  मातु! भवानी, निशुंभ-शुंभ मर्दिनी...
भद्र काली कपाली, रोग भय से तारिणी ...

क्षमा, शिवा, धात्री, शक्ति रूप प्रदायिनी ...
शैलपुत्री कूष्मांडा, स्कंदमाता कात्यायनी....

दुःख हरता, सुख करता, चंडी पिनाकधारणी...
स्वाहा, स्वधा, मातु, तुम जगत कल्याणी...

चित्त में धीर हो, कर्म  सदा करूँ शिवांगी...
सिद्धिदात्री माँ सरस्वती, बुद्धि दो हे सुरेश्वरी...

विकार मुक्त हो हृदय, भजामि शूलधारणी...
न प्रेम दृष्टि बाध्य हो, सुनो हे ब्रह्मचारिणी...

मनुष्यता रहे अटूट, सत्य रहे सदा विचारणी..
विश्व शांति स्नेह हो, भरो सुज्ञान मुक्तिदायनी..

रचयिता
वन्दना यादव "गज़ल"
अभिनव प्रा० वि० चन्दवक,
डोभी, जौनपुर।

Comments

Total Pageviews