2 अक्टूबर
दो अक्टूबर का दिन आया, हमको हरषाया रे,
गांधी और शास्त्री के जन्मदिन, आज मनाएँ हम रे।
गांधी जिनको बापू, राष्ट्रपिता भी हम हैं कहते,
शास्त्री लालबहादुर के कार्यों से प्रफुल्लित होते।
विश्व शांति की भाषा को दोनों ने फैलाया रे......
दो अक्टूबर का दिन आया मन को हरषाया रे।
सरल स्वभाव के धनी थे दोनों, दोनों थे धरती की शान,
सत्य-अहिंसा एक ने माना, एक ने जय-जवान, जय-किसान।
स्वतंत्रता की लड़ी लड़ाई, देश आजाद कराया रे........
दो अक्टूबर का दिन आया मन को हरषाया रे।
राष्ट्रहित में इन महापुरुषों ने किए अनोखे ऐसे काम,
हम भारतवासी मिल आज भी श्रद्धापूर्वक करें उन्हें प्रणाम।
कर्मपथ पे चलने वाले, भारत का मान बढ़ाया रे...........
दो अक्टूबर का दिन आया मन को हरषाया रे ।
रचयिता
अरविन्द कुमार सिंह,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय धवकलगंज,
विकास खण्ड-बड़ागाँव,
जनपद-वाराणसी।
गांधी और शास्त्री के जन्मदिन, आज मनाएँ हम रे।
गांधी जिनको बापू, राष्ट्रपिता भी हम हैं कहते,
शास्त्री लालबहादुर के कार्यों से प्रफुल्लित होते।
विश्व शांति की भाषा को दोनों ने फैलाया रे......
दो अक्टूबर का दिन आया मन को हरषाया रे।
सरल स्वभाव के धनी थे दोनों, दोनों थे धरती की शान,
सत्य-अहिंसा एक ने माना, एक ने जय-जवान, जय-किसान।
स्वतंत्रता की लड़ी लड़ाई, देश आजाद कराया रे........
दो अक्टूबर का दिन आया मन को हरषाया रे।
राष्ट्रहित में इन महापुरुषों ने किए अनोखे ऐसे काम,
हम भारतवासी मिल आज भी श्रद्धापूर्वक करें उन्हें प्रणाम।
कर्मपथ पे चलने वाले, भारत का मान बढ़ाया रे...........
दो अक्टूबर का दिन आया मन को हरषाया रे ।
रचयिता
अरविन्द कुमार सिंह,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय धवकलगंज,
विकास खण्ड-बड़ागाँव,
जनपद-वाराणसी।

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