कटी पतंग

देखो-देखो उड़ी पतंग
वो देखो फिर कटी पतंग।
आ जा टीनू जल्दी आ जा,
आ जा मोनू जल्दी आ जा।
लुट नहीं जाए कहीं पतंग,
वो देखो लुट गई पतंग।।

भागो-भागो दौड़ो-दौड़ो,
मंझे के संग गई पतंग।
वो देखो अब गई पतंग।
आहा! अब तो गई पतंग।।
मैया के चरणों गिर जाऊँ,
नई पतंग फिर से मँगवाऊँ।
नहीं मानेगी, नहीं मानेगी,
मेरी मैया  नहीं  मानेगी।
पढ़ने की अब जिद ठानेगी।।
ओहो! अब तो गई पतंग।
मन में ही रह गई उमंग।।

पापा जल्दी आओ ना,
एक पतंग लाओ ना।
झप्पी दे दुलराओ ना,
प्यारी माँ से बचाओ ना।।

रचयिता
प्रार्थना मिश्रा,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय नगला हरिकेशी,
विकास खण्ड-खंदौली,
जनपद-आगरा।

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