महात्मा गांधी
एक पुरूष महान हुए जग में
राष्ट्रपिता वो कहलाये,
मोहनदास करमचंद गाँधी नाम था
बापू बनकर वो जग में छाये,
पिता-करमचंद गांधी और थी माता-पुतलीबाई,
दो अक्टूबर 1869पोरबंदर (गुजरात)में जन्मे थे भाई।
माता जैसा चरित्र धार्मिक और संकोची स्वभाव रहा,
सुन्दर लेख नहीं लिख पाये
उनको यही मलाल रहा।
मैट्रिक्स करके गये विलायत,
वकालत उनका कार्य था।
अफ्रीका में कदम रखा तो,
संघर्षों का अम्बार रहा।
अन्याय का किया सामना,
तनिक नहीं अपमान सहा।
1915 में लौटे भारत लेकर,
एक अवतार नया।
कूद पड़े वो अन्दोलन में,
सत्य अहिंसा हथियार रहा।
असहयोग हो या डांडी मार्च,
सदा स्वदेशी पर ध्यान रहा।
भारत छोड़ो के नारों से,
अंग्रजों का सर्वविनाश किया।
सर्वोदय का स्वप्न दिखाकर,
रामराज्य का विकल्प दिया।
रोजगार से जोड़ी शिक्षा,
स्वस्थ शरीर हो ध्यान किया।
जनहित के उद्धार हेतु,
वस्त्रों का परित्याग किया।
बापू ने अपने विचारों से, "वसुधैव कुटुंबकम" का आह्वान किया।
30 जनवरी 1948 को,
कुछ हत्यारों ने गांधीजी पर वार किया।
हो गया शरीर अदृश्य भले,
पर नाम महत्मा गांधी अमर रहा।।
रचयिता
अनु चौधरी,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय शंकरपुर,
विकास खण्ड-फरीदपुर,
जनपद-बरेली।
राष्ट्रपिता वो कहलाये,
मोहनदास करमचंद गाँधी नाम था
बापू बनकर वो जग में छाये,
पिता-करमचंद गांधी और थी माता-पुतलीबाई,
दो अक्टूबर 1869पोरबंदर (गुजरात)में जन्मे थे भाई।
माता जैसा चरित्र धार्मिक और संकोची स्वभाव रहा,
सुन्दर लेख नहीं लिख पाये
उनको यही मलाल रहा।
मैट्रिक्स करके गये विलायत,
वकालत उनका कार्य था।
अफ्रीका में कदम रखा तो,
संघर्षों का अम्बार रहा।
अन्याय का किया सामना,
तनिक नहीं अपमान सहा।
1915 में लौटे भारत लेकर,
एक अवतार नया।
कूद पड़े वो अन्दोलन में,
सत्य अहिंसा हथियार रहा।
असहयोग हो या डांडी मार्च,
सदा स्वदेशी पर ध्यान रहा।
भारत छोड़ो के नारों से,
अंग्रजों का सर्वविनाश किया।
सर्वोदय का स्वप्न दिखाकर,
रामराज्य का विकल्प दिया।
रोजगार से जोड़ी शिक्षा,
स्वस्थ शरीर हो ध्यान किया।
जनहित के उद्धार हेतु,
वस्त्रों का परित्याग किया।
बापू ने अपने विचारों से, "वसुधैव कुटुंबकम" का आह्वान किया।
30 जनवरी 1948 को,
कुछ हत्यारों ने गांधीजी पर वार किया।
हो गया शरीर अदृश्य भले,
पर नाम महत्मा गांधी अमर रहा।।
रचयिता
अनु चौधरी,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय शंकरपुर,
विकास खण्ड-फरीदपुर,
जनपद-बरेली।

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