शुभ सन्देश लेकर आया है दशहरा

शुभ सन्देश लेकर आया फिर दशहरा,
शुभ सन्देश लेकर आया फिर दशहरा।।
  चारों तरफ संकट है घनेरा,
   होना व्याकुल  मन ये तेरा।।
मुसीबतों का अंधकार छँटेगा,
होगा फिर सुन्दर    सवेरा।।
  शुभ सन्देश लेकर आया है दशहरा।।
जीत सत्य की  हुई हमेशा,
   हारी है        बुराई,
ये पर्व यही तो कहता है,
सदा  करो   तुम भलाई।।
  छल कपट को त्याग दो,
  धैर्य   रहे   मन में तेरा,
टूटे दिल   फिर से मिलेंगे,
आएगा जरूर  वह सबेरा।
शुभ सन्देश लेकर आया है दशहरा।।
  रावण की तरह बनना न अभिमानी,
  इसी अभिमान   ने सोने की लंका जलाई।।
जिसने भी अभिमान किया,
उसकी हुई  हमेशा   हार,
दशहरा का पर्व    देता,
  यही संदेश  बार -  बार।।
शुभ सन्देश लेकर आया फिर दशहरा,
शुभ सन्देश लेकर आया फिर दशहरा।।

रचयिता
इन्दु पंवार,
प्रधानाध्यापक,
रा. प्राथमिक विद्यालय गिरगाँव,
जनपद-पौड़ी गढ़वाल,
उत्तराखण्ड।

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