मैं सौ दुर्गा को लाई हूँ

बहुत हो गया धैर्य साहब
शस्त्र उठाने आई हूँ।
नारी की चीत्कार नहीं
हुँकार सुनाने आई हूँ।।

१) कभी गार्गी कभी अपाला
कभी विदुषी बन आई हूँ।
नारी को तू हाथ लगाये
झाँसी की तलवार मैं लाई हूँ।।

२) कभी लक्ष्मी कभी सरस्वती
कभी दुर्गा बन आई हूँ।
नंगा नाच दिखाये जब तू
रणचण्डी बन मैं आई हूँ।।

३) नारी का सम्मान करे जब
सावित्री बन आई हूँ।
जिस्म नोंचकर जब तू खाये
काली का खप्पर लाई हूँ।।

४) कौशल्या का सम्मान करे तो
राम रूप में जाई हूँ।
गर बू जो काम दाम की आवे
*सीमा को जग में लाई हूँ।।

५) एक चीख भी अगर सुनी तो
तुम न बचने पाओगे।
इस बार अकेली एक नहीं
मैं सौ दुर्गा को लाई हूँ।
मैं सौ दुर्गा को लाई हूँ।।
 
नोट-सीमा(इण्डियन कमाण्डो ट्रेनर)

रचयिता
आयुषी अग्रवाल,
सहायक अध्यापक,
कम्पोजिट विद्यालय शेखूपुर खास,
विकास खण्ड-कुन्दरकी,
जनपद-मुरादाबाद।

Comments

Post a Comment

Total Pageviews