बेटियों को सीख

देवी स्वरुपा बेटियों को सीख

आजाद घूमो फँस न जाना,
तुम कहीं भी जाल में।
बहरुपिए दानव बने बसते,
मनुज तन खाल में।।

सुसंस्कृत कर्मठ सुदृढ़ बन,
रखना सदा व्यवहार निर्मल।
बदलो कुदृष्टि भाव यदि जन,
संलिप्त दिखे अघ-चाल में।।

तुम मान-मर्यादा मूर्ति जननी,
सदृश्य रहना हर काल में।
सम्मुख नहीं पित दुखित हो,
रहते प्रसन्न जंजाल में।।

तुम देवतुल्य विदुषी प्रिया,
राधा मही हो वसुंधरा।
“नैमिष” करे नमन बनना,
उत्कृष्ट श्रेष्ठ हर हाल में।।

माँ बहन बेटी पत्नी तुम,
देवी दुर्गा सम काल में।
स्वसम्मान बनाए रखना,
पूजे जगत हर हाल में।

उन्नति करो आगे बढ़ो,
चहुँदिश तुम्हारा यश बढ़े।
गिनती शुरू तुमसे ही हो,
हर जवान पर हर मिसाल में।

रचयिता
श्रीमती नैमिष शर्मा,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय तेहरा,
विकास खंड-मथुरा,
जिला-मथुरा।
उत्तर प्रदेश।

Comments

  1. बहुत अच्छा और सही लिखा है।,,🌹🌹

    👏👏👏

    ReplyDelete
  2. बहुत सुंदर लिखा है मैम आपने बेटियों के के लिए

    ReplyDelete
  3. अपनी वेटी के अलावा उन सभी वेटियों को जो माता पिता से दूर रहकर अपना कैरियर सँभालने जाती हैं। बहुत आवश्यक समझकर लिख दिया। धन्यवाद

    ReplyDelete
  4. Very nice words selected. Superb. Keep teaching and inspiring the daughters of this generation. You are doing a great work.

    ReplyDelete
    Replies
    1. Thanks
      So many times I wrote to teach children / daughters, soldiers and values etc. It's my passion.

      Delete

Post a Comment

Total Pageviews