बापू तुमको नमन
अहिंसा भरा था मार्ग तुम्हारा,
सच्चाई का लिए सहारा।
प्रेम, दया व क्षमा भरा,
अर्पण किया है जीवन सारा।
बापू तुम को नमन हमारा।।
अस्त्र नहीं शस्त्र नहीं,
शरीर पर अधिक वस्त्र नहीं।
दृढ़ इच्छा व अडिग इरादा,
भलाई व परोपकार ज्यादा।
बापू तुम को नमन हमारा।।
वस्त्र नहीं चरित्र है पहचान,
सत्य, अहिंसा और प्रेम महान।
शत्रु को भी अपना मान,
दीन-हीन को दिया सम्मान।
बापू तुम को नमन हमारा।।
रचयिता
प्रियंशा मौर्य,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय चिलार,
विकास क्षेत्र-देवकली,
जनपद-गाजीपुर।
सच्चाई का लिए सहारा।
प्रेम, दया व क्षमा भरा,
अर्पण किया है जीवन सारा।
बापू तुम को नमन हमारा।।
अस्त्र नहीं शस्त्र नहीं,
शरीर पर अधिक वस्त्र नहीं।
दृढ़ इच्छा व अडिग इरादा,
भलाई व परोपकार ज्यादा।
बापू तुम को नमन हमारा।।
वस्त्र नहीं चरित्र है पहचान,
सत्य, अहिंसा और प्रेम महान।
शत्रु को भी अपना मान,
दीन-हीन को दिया सम्मान।
बापू तुम को नमन हमारा।।
रचयिता
प्रियंशा मौर्य,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय चिलार,
विकास क्षेत्र-देवकली,
जनपद-गाजीपुर।

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