राम जी तोहरी परूँ मैं चरनवाँ
कौशल्या कै अंगना में किलकारी मचावै।
कैकेयी मैया भी बलि-बलि जावें।
पैजनियां बाजै तो गूंजे अंगनवां।
राम जी तोहरी परूँ मैं चरनवाँ।
भोले शंकर, बाबा कै रूप धरि आवैं।
कबहूँ देखें तो कबहूँ निरखावैं।
दशरथ बाँटें सोना चांदी होयँ मगनवां।
राम जी तोहरी--------------
विश्वामित्र जी राम के माँगई आवैं।
दशरथ सुनिके अवाक रहि जावें।
कइसे देई दुइनव ललनवा
राम जी तोहरी-------------
दुइनव भाई गुरु के पैर दबावैं।
होत सबेर पूजा के फूल लइ आवैं।
एकै बाण में लिहलन सुबाहु के परनवा।
राम जी तोहरी--------------------
मिथिला मे जनक जी स्वयम्बर रचावैं।
बड़े-बड़े राजा ख्वाब सजावें।
धनुषा टूटत, सीता के खुश होय मनवा।
राम जी तोहरी--------------
सब जन मिलि के महल सजावें।
राजा होइहैं राम, मन में हरषावै।
कुबरी फेर दिहलीन कैकेई के मनवा।
राम जी तोहरी--------------------
भरत जी अयोध्या के राजा होइहैं।
वल्कल पहिनि के राम बन के जइहैं।
ई दुइ वचन, लै लिहलस दशरथ के परनवा।
राम जी तोहरी-----------------
सगरी अयोध्या शोक में डुबाई।
माता कौशल्या जियतै मराई।
सीता संग लक्ष्मण भी गइले बनवा।
राम जी तोहरी------------------
भाई भरत जी राम के मनावें।
सगरी बतिया भुलाई के अवध चलि आवैं।
दुइ पादुका लई भरत केहेन राज अवध मा।
राम जी तोहरी---------------
सोने के मृग बनि मारीच राम के भरमावै।
साधू बनि के रावण सीता कै लंका लई जावै।
विह्वल होइ दुइनव भाई घूमै बन बन मा।
राम जी तोहरी--------- ----
सबरी के जूठे बेर भी मन से खावैं।
बन्दर भालू के गले से लगावैं।
हनुमान जी सुग्रीव से कई देहलन मिलनवा।
राम जी तोहरी------------ -------
हनुमानजी सीता कै राम के हाल बतावैं।
लंका में जाई के आग लगावैं।
सगरी लंका के सूखी गय परनवा।
राम जी तोहरी-----------------
बानर भालू मिलि लंका पे चढ़ि जावैं।
विभीषण जी रावण के मृत्यु के राज बतावैं।
एकै बाण लिहलस रावण के परनवा।
राम जी तोहरी--------
सब जन मिली के दशहरा मनावैं।
ब्रजेश जी सबहीं के सच के राज बतावैं।
चला चली घूमि आयी राम के अंगनवां।
राम जी तोहरी परूँ मैं चरनवाँ।
रचयिता
ब्रजेश कुमार द्विवेदी,
प्रधानध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय कोइलिहा,
जनपद-बलरामपुर।
कैकेयी मैया भी बलि-बलि जावें।
पैजनियां बाजै तो गूंजे अंगनवां।
राम जी तोहरी परूँ मैं चरनवाँ।
भोले शंकर, बाबा कै रूप धरि आवैं।
कबहूँ देखें तो कबहूँ निरखावैं।
दशरथ बाँटें सोना चांदी होयँ मगनवां।
राम जी तोहरी--------------
विश्वामित्र जी राम के माँगई आवैं।
दशरथ सुनिके अवाक रहि जावें।
कइसे देई दुइनव ललनवा
राम जी तोहरी-------------
दुइनव भाई गुरु के पैर दबावैं।
होत सबेर पूजा के फूल लइ आवैं।
एकै बाण में लिहलन सुबाहु के परनवा।
राम जी तोहरी--------------------
मिथिला मे जनक जी स्वयम्बर रचावैं।
बड़े-बड़े राजा ख्वाब सजावें।
धनुषा टूटत, सीता के खुश होय मनवा।
राम जी तोहरी--------------
सब जन मिलि के महल सजावें।
राजा होइहैं राम, मन में हरषावै।
कुबरी फेर दिहलीन कैकेई के मनवा।
राम जी तोहरी--------------------
भरत जी अयोध्या के राजा होइहैं।
वल्कल पहिनि के राम बन के जइहैं।
ई दुइ वचन, लै लिहलस दशरथ के परनवा।
राम जी तोहरी-----------------
सगरी अयोध्या शोक में डुबाई।
माता कौशल्या जियतै मराई।
सीता संग लक्ष्मण भी गइले बनवा।
राम जी तोहरी------------------
भाई भरत जी राम के मनावें।
सगरी बतिया भुलाई के अवध चलि आवैं।
दुइ पादुका लई भरत केहेन राज अवध मा।
राम जी तोहरी---------------
सोने के मृग बनि मारीच राम के भरमावै।
साधू बनि के रावण सीता कै लंका लई जावै।
विह्वल होइ दुइनव भाई घूमै बन बन मा।
राम जी तोहरी--------- ----
सबरी के जूठे बेर भी मन से खावैं।
बन्दर भालू के गले से लगावैं।
हनुमान जी सुग्रीव से कई देहलन मिलनवा।
राम जी तोहरी------------ -------
हनुमानजी सीता कै राम के हाल बतावैं।
लंका में जाई के आग लगावैं।
सगरी लंका के सूखी गय परनवा।
राम जी तोहरी-----------------
बानर भालू मिलि लंका पे चढ़ि जावैं।
विभीषण जी रावण के मृत्यु के राज बतावैं।
एकै बाण लिहलस रावण के परनवा।
राम जी तोहरी--------
सब जन मिली के दशहरा मनावैं।
ब्रजेश जी सबहीं के सच के राज बतावैं।
चला चली घूमि आयी राम के अंगनवां।
राम जी तोहरी परूँ मैं चरनवाँ।
रचयिता
ब्रजेश कुमार द्विवेदी,
प्रधानध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय कोइलिहा,
जनपद-बलरामपुर।

Nice
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