महिला सशक्तीकरण विशेषांक 168 ,सुमित्रा फरस्वाण, उत्तराखंड
*👩👩👧👧महिला सशक्तीकरण विशेषांक-168*
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*मिशन शिक्षण संवाद परिवार की बहनों की संघर्ष और सफ़लता की कहानी*
(दिनाँक- 05 अक्टूबर 2019)
नाम-श्रीमती सुमित्रा फरस्वाण
पद-प्र०अ०
विद्यालय-रा०प्रा०वि० निजमूला
विकास खण्ड-दशोली
जिला चमोली उत्तराखण्ड
*सफलता एवं संघर्ष की कहानी :-*
👉
प्रथम नियुक्ति- 31-10-1989
पदोन्नति_1-1-2000
वर्तमान विद्यालय में नियुक्त_15-7-2015
*यदि पग पर विखरे शूल न होते*
*जीवन का आभास न होता।*मंजिल मंजिल ही रह जाता*
*जीवन काल इतिहास न होता !*
*🙏🏻मेरे द्वारा किये गये विद्यालय विकास और छात्र हित के कार्य*------
मेरी प्रथम नियुक्ति रा प्रा वि मैठाणा में हुई थी उस समय विद्यालय में कोई सुविधाएं उपलब्ध नहीं होती थी बैठने तक को कुर्सी नहीं थी
1👉मेरी सर्विस का सबसे अधिक समय रा प्रा वि लुहा दिगोली में बीता वहां पर मैंने 7-7-2002को कार्य भार ग्रहण किया था और 14-7-20015=तक रही हूं
यहां पर पहले सभी बच्चे ज्यादातर प्राइवेट स्कूलों में जाते थे स्कूल कालेज भवन भी पूर्णतः क्षतिग्रस्त था !
मैंने सबसे पहले तो विद्यालय के पठन-पाठन में सुधार करने खां प्रयास किया काफ़ी प्रयास के बाद बच्चे प्राइवेट स्कूल से हमारे विद्यालय में आ गये
2👉-भवन की स्थिति सुधारने के लिए विद्यालय में वार्षिकोत्सव खां आयोजन कराया गया जिसमें विधायक जी को बुलाया गया उनके द्वारा एक आफिस और एक कमरे की घोषणा की गती ऐसे ही एक कमरा किचन सर्वशिक्षा से प्राप्त हुआ तब जाकर नया भवन बनाया गया!
3👉_विदयालय में पंखे हेतु मेरे और क्षेत्र पंचायत द्वारा स्टेट बैंक से सम्पर्क किया गया काफी प्रयास के बाद विद्यालय हेतु बैंक से 5पखे प्राप्त हुए।
4--👉 चाहर दीवारी हेतू पुनः विद्यालय में वार्षिकोत्सव खां आयोजन कराया गया जिसमें जिला पंचायत सदस्य द्वारा चारदीवारी और गेट हेतु धनराशि दी गयी।
5-👉-बालिका शिक्षा हेतु घर घर सम्परक किया गया आज उस गांव की एक भी बालिका शिक्षा से वंचित नहीं है
6-👉समुदाय का विद्यालय कार्यों में पूर्ण सहयोग लिया जाता है
उसके बाद जब मैं दुर्गम के विदयालय निजमूला गयी तो वहां की स्थिति की बहुत ही चिंताजनक थी *वर्तमान विद्यालय में मेरे द्वारा किए गये प्रयास*
1👉-सबसे पहले तो विद्यालय में बच्चों के समय पर न पहुंचने के कारण अभिभावकों से सम्पर्क किया गया ।
2--👉छात्रों की नियमित उपस्थिति हेतु अभिभावकों को विद्यालय में बुलाकर उनसे चर्चा कर उन्हें समझाया गया और नियमित उपस्थिति के बारे में जानकारी दी गयी
3-👉ग्राम प्रधान और गांव वासियों से सम्पर्क किया गया तब जाकर उनके सहयोग से प्रार्थना स्थल को बढ़ाया गया आज बच्चों को बैठने हेतु सुविधा हुई है
4-👉 विद्यालय की चाहर दीवारी हेतु अभिभावकों और प्रबंधन समिति के सहयोग से विदयालय में वार्षिकोत्सव कि आयोजन किया गया जिसमें जिला पंचायत सदस्य द्वारा विद्यालय हेतु धनराशि दी गई उससे आज विद्यालय में चाहर दीवारी कराई गई है और उस चाहर दीवारी में मेरे द्वारा छात्रों के हित में उस पर अनेक प्रकार की सामानय चीजें लिखी गई है
5--👉शौचालय अभियान गांव में चलाया गया विद्यालय परिवार द्वारा और स्वयं भी एक शौचालय की मांग गा्म प्रधान से विद्यालय हेतु की गई और शौचालय बना भी दिया गया है
6👉-पेय जल हेतु बहुत प्रयास किया गया विद्यालय में पानी नहीं आता था तब अभिभावकों कुछ बैठक बुलाकर प्रबंधन समिति के सहयोग से श्रमदान कर विद्यालय में पानी की व्यवस्था की गई
7-👉विदयालय में जाडो में अत्यधिक ठंड होती है तो उसके लिए भी सभी के सहयोग से विद्यालय में लकड़ी की व्यवस्था कर दी जाती है सबसे बड़ा सहयोग प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष श्री विक्रम सिंह रावत जी का रहता है
8-👉हर वर्ष मेरे द्वारा छात्रों को शैक्षिक भ्रमण कराया जाता है देवरिया ताल औली तडाग ताल आदि जगह जिससे दुर्गम क्षेत्र के बच्चों काल मनोबल बढ़ता है और वे बाहर के समाज से भी कुछ सीखने का प्रयास करते हैं
9-👉सभी गरीब छात्रों को हमेशा मदद कर उन्हें आगे बढ़ने हेतु प्रेरित करना
10-👉आज मेरे विद्यालय के बच्चे दीवार पत्रिका ,बाल अखबार लिफाफे बनाना पत्रिकाओं में अपनी कविता और लेख लिखने में समर्थ है
11👉-इस साल जब मुझे राज्यपाल अवार्ड मिला और फिर में विद्यालय में गयी तो जो तैयारियां गांव वालों और विद्यालय के बच्चों और प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्री विक्रम सिंह रावत जी द्वारा की गई थी उसके लिए में उनका यह दिल से धन्यवाद भी करना चाहती हूं
*संदेश* 👉 *वह पथ क्या पथिक कुशलता क्या*
*जिस पर विखरे शूल न हो*
*अध्यापक की धैर्य परीक्षा क्या*
*जब धाराये प्रतिकूल न हो।*
*📝संकलनकर्ता*---- *लक्ष्मण सिंह मेहता* *राज्य प्रभारी* *मिशन शिक्षण संवाद उत्तराखंड*
_✏संकलन_
*📝टीम मिशन शिक्षण संवाद।*
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