राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त
हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि और राष्ट्र कवि,
खड़ी बोली के थे प्रथम महत्वपूर्ण कवि।
मैथिलीशरण गुप्त है पावन नाम,
दद्दा के नाम से संबोधित होते थे ये कवि।।
3 अगस्त 1846 चिरगांव चमका यह नक्षत्र,
खड़ी बोली से सम्मान पाया सर्वत्र।
कविता के इतिहास में था योगदान,
मानवीय संबंधों की रक्षा मिलेगी यत्र- तत्र।।
पंचवटी, जयद्रथ -वध, यशोधरा रच डाले,
साकेत लिखकर प्रतिफलित हुए मतवाले।
घर पर बांग्ला, संस्कृत साहित्य का किया अध्ययन,
प्रथम संग्रह "रंग में भंग" प्रकाशित कर डाले।।
सरस्वती पत्रिका में था अभूतपूर्व योगदान,
सत्याग्रह में भाग लिया जेल किया सहन।
महात्मा गांधी से राष्ट्रकवि की पदवी पाए,
जेल से छूट कर पाए डी-लिट का सम्मान।।
1935 में "हिंदुस्तान अकादमी पुरस्कार" पाया,
1937 में "मंगला प्रसाद पुरस्कार" आया।
1946 में "साहित्य वाचस्पति" मिला सम्मान,
1954 में "पद्मभूषण" भी झोली में आया।।
2 महाकाव्य, 19 खंडकाव्य और काव्य गीत लिखा,
काव्य में राष्ट्रीय चेतना, धार्मिक भावना दिखा।
भारतभारती में देश के अतीत, वर्तमान, भविष्य का चित्रण,
12 दिसंबर 1964 अस्त हुआ सितारा फिर न दिखा।।

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