बाल गंगाधर तिलक

लाल-बाल-पाल की तिकड़ी,

बिना आपके रही अधूरी।

राष्ट्रवादी स्वतंत्रता सेनानी,

जन्म स्थान महाराष्ट्र रत्नागिरी।।


गीता का सार समझा कर,

नवल ज्ञान का दीप जलाया।

स्वतंत्रता अधिकार जन्म से,

जन-जन को यह बतलाया।।


खगोल शास्त्र गणित का ज्ञाता,

भारत माँ का अभय वीर।

प्रतिभावान संस्कृत का ज्ञानी,

हरने आया समाज की पीर।।


आजादी के रण में आपने,

तन-मन-धन सब कुछ  वारा।

लोकमान्य उपनाम अपनाए,

शत-शत नमन आपको हमारा।।


सामाजिक कुरीतियों को,

निडरता से ललकारा।

अविचल अडिग सेनानी,

बाल गंगाधर तिलक हमारा।।


गरम विचारों को अपनाकर,

क्रान्ति का संदेश दिया।

जननी भारत माता को,

धन्य-धन्य गर्वित किया।।


रचयिता

ज्योति विश्वकर्मा,

सहायक अध्यापिका,

पूर्व माध्यमिक विद्यालय जारी भाग 1,

विकास क्षेत्र-बड़ोखर खुर्द,

जनपद-बाँदा।

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