हर कोई होता सच्चा दोस्त नहीं है

बनकर दोस्त फिर घात करे जो,

वह तो होता दोस्त नहीं है।

बहुत सँभलकर दोस्त बनाना,

हर कोई होता सच्चा दोस्त नहीं है।।


तेरी खुशियों से जल जाते जो,

मन में कपट की ज्वाला जलाते।

 ख़ंजर हाथो में लेकर के फिर,

सम्मुख घड़ियाली अश्क बहाते।

सदा मिटाने की जो सोचे,

वह तो सच्चा दोस्त नहीं है।

बहुत सँभलकर दोस्त बनाना,

हर कोई होता सच्चा दोस्त नहीं है।


मीठी-मीठी बात करेंगे,

उर में द्वेष के भाव रखेंगे।

अवसर पाकर फिर एक दिन वह,

सीधे सिर पर पाँव धरेंगे।

अशोक सजग रहना तुम हर पल,

जल्दी मिलते सच्चे दोस्त नहीं हैं।

बहुत सँभलकर दोस्त बनाना,

हर कोई होता सच्चा दोस्त नहीं है।।


रचयिता
अशोक कुमार,
सहायक अध्यापक,
कम्पोजिट प्राथमिक विद्यालय रामपुर कल्याणगढ़,
विकास खण्ड-मानिकपुर,
जनपद-चित्रकूट।

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