मित्रता दिवस
मित्रता हो मुबारक तुम्हें और हमें,
मित्र बनकर हमारी फतह जो किया।
साथ हर मोड़ पर दे वो तूने परम,
मेरी राहों को हर वक्त रौशन किया।।
थे अजनबी बने हम जमाने में यूँ,
तूने शोहरत दिला मन मगन कर दिया।
तेरे देखे कभी ना ही भीगे नयन,
बन खुदा हर घड़ी हौसला ही दिया।।
कभी नाराजगी ना दिखायी हमें,
मेरी चाहत में सब कुछ है अपना दिया।
कभी उलझाया भी वक्त का दौर जो,
तूने उलझन से अब तो बचा है लिया।।
मुनासिब जो समझा है मेरे लिए,
वो बसंत और बहार की अद्भुत छटा।
ला दिया है सुवासित, मनोरम, मधुर,
सुख के अनुभूति की वो आनंदित घटा।।
ढूँढता हर कोई रब कहाँ पर मिले?
तेरे जैसा हमें रब है आकर मिला।।
जिंदगी जीना सीखा तेरा साथ पा,
मेरे उर में हमेशा दिखे तू खिला।।
काश! मैं भी सकूँ दे वो तुम्हें सभी,
तूने हँसकर जो मुझपे लुटा है दिया।
नेह की बारिशें, अनगिनत ख्वाहिशें,
शुक्रिया मित्र फिर-फिर तुम्हें शुक्रिया।।
रचयिता
अरविन्द कुमार सिंह,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय धवकलगंज,
विकास खण्ड-बड़ागाँव,
जनपद-वाराणसी।

सुन्दर रचना।
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