पिंगली वेंकैया
धन्य धरा आन्ध्र प्रदेश की,
धन्य-धन्य भातलापेन्नुमारु।
पिता हनुमंता माँ वेंकटरत्नम्मा,
ब्राह्मण कुल योगी तेलुगु।।
उर्दू जापानी के ज्ञाता,
कृषि भू-विज्ञान से लगाव।
हीरा खदानों के विशेषज्ञ,
गांधीजी का था प्रभाव।।
कपास की विभिन्न किस्मों पर,
किये अनेकों शोध कार्य।
भारतीय संकरित कपास बना,
'कपास वैंकेया' नाम का आधार।।
सन् 1916 से 1921 तक,
विभिन्न फलों का अध्ययन किया।
अन्त में यशस्वी वैंकेया ने,
भारत का राष्ट्रध्वज विकसित किया।।
'कपास वैंकेया' तबसे बच्चों,
झण्डा वैंकेया कहलाए।
4 जुलाई 1963 को,
पिंगली वैंकेया स्वर्ग सिधारे।।
देश के हित जो किया कार्य,
प्रणाम आपको बारम्बार।
अद्भुत प्रतिभा के धनी वेंकैया,
करो कलम का नमन स्वीकार।।
रचयिता
ज्योति विश्वकर्मा,
सहायक अध्यापिका,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय जारी भाग 1,
विकास क्षेत्र-बड़ोखर खुर्द,
जनपद-बाँदा।

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