अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस

वह इंसान जो श्रम के बदले मेहनताना है पाता,
वही इंसान इस दुनिया मे “मजदूर" है कहलाता।
ज्यादा का लोभ नहीं, कम में ही खुश हो जाता,
उसकी सफलता पर भी, देश भी तरक्की पाता।

दिन भर जो पसीना बहाकर करे कमाई,
मेहनत में कोई खोट नहीं, है बस सच्चाई।
छोटे, बड़े काम में उसने अपनी कला दिखाई,
उस मजदूर के बिना, सबके काम अधूरे हैं भाई।

कल-कारखाने हों या हों खेत-खलिहान,
‛मजदूर' नही तो सब होंगे ये खाली स्थान।
माना की अब यह मशीनों का युग है,
पर मशीन, बनाने में भी मजदूर ही सब है।

अगर देखें हम जो सात अजूबे दुनिया के,
जिन्हें देख सब उँगली दबाएँ दाँतों तले।
ऐतिहासिक धरोहरों पर कहीं नाम नहीं उनका,
निर्माण करने में शायद जीवन गया जिनका।

निर्धन पर मेहनतकश घर में जन्म वो पाते।
मेहनत से शिल्प कला में पारंगत हो जाते।
अपनी वैज्ञानिक, कला से औजार स्वयं बनाते,
बिना नाम, सम्मान के इतिहास भी बना जाते।

आओ हम सब बच्चों को यह पाठ भी पढ़ाएँ,
काम कोई छोटा नहीं, सम्मान सभी जन पाएँ।
माह मई की प्रथम तिथि को यह घड़ी है आई,
“अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस" पर, सभी को बधाई।

रचयिता
दीपा आर्य,
प्रधानाध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय लमगड़ा,
विकास खण्ड-लमगड़ा,
जनपद-अल्मोड़ा,
उत्तराखण्ड।


Comments

  1. बहुत बढ़िया लिखी है कविता

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