दृष्टिदान दिवस
तर्ज---- दान कन्या का जिसने दिया
दान आँखों का जिसने दिया....
बड़ा पुण्य उसने किया .......
जिसनें अंधों के जीवन को रौशन किया,
कोई दान कहाॅं इससे बड़ा।
दान आँखों का जिसने दिया....
बड़ा पुण्य उसने किया .......
ईश्वर का वरदान हैं आँखें,
इंसा के चेहरे की शान हैं आँखें,
दुनिया की रौनक दिखायें आँखें।
दान आँखों का जिसने दिया.....
बड़ा पुण्य उसने किया.......
नेत्र, चक्षु कहो या सुदंर नयना,
आँखों की भाषा का क्या कहना,
देकर आँखें किसी को जीवन दिया।
दान आँखों का जिसने दिया.......
बड़ा पुण्य उसने किया.......
रचयिता
शालिनी,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय बनी,
विकास खण्ड-अलीगंज,
जनपद-एटा।

बहुत ही सुंदर कविता शालिनी जी अति सुंदर
ReplyDeleteReally very nice poem
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