विश्व महासागर दिवस

ठंडी - ठंडी हवा यहाँ,

मन तरंग को ललचाए।

सागर जरूरी हैं कितने,

हौले-हौले यह समझाए।।


पानी का भंडार यहाँ,

पौधे जीव शैवाल मिलें,

सागर ही तो हैं जिनसे,

पृथ्वी नीला ग्रह बने।।


रत्नों का भंडार यहाँ,

देखो कितनी है गहराई।

सम्मान में सूर्य ने भी,

किरणों की चादर फैलाई।।


आती-जाती लहरें रेत पर,

हर पल कुछ लिख जातीं।

दूर छोर पर देखो कैसे,

नभ से आलिंगन पातीं।।


सीप को मोती बना,

मानुष को सौंप दिया।

जीवन आनंद लिया फिर,

पीठ में छुरा घोंप दिया।।


सागर की लहरों का,

आनंद हम सभी उठाते,

पर नासमझी में अपनी,

प्रदूषण यहाँ फैलाते।।


पिकनिक के आनंद में,

हम सब इतना खो जाते।

प्लास्टिक के पैकेट बोतल,

वहीं छोड़कर आ जाते।।


सीफूड प्रोटीन स्रोत जो,

पोषक तत्वों से भरपूर।

करो सुरक्षा सागरों की,

रखो प्रदूषण यहाँ से दूर।।


प्रतिवर्ष 8 जून को हम सब,

विश्व महासागर दिवस मनाएँ।

स्वच्छता जरूरी है इनकी,

आओ सबको यह समझाएँ।।


रचयिता

ज्योति विश्वकर्मा,

सहायक अध्यापिका,

पूर्व माध्यमिक विद्यालय जारी भाग 1,

विकास क्षेत्र-बड़ोखर खुर्द,

जनपद-बाँदा।



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