वट सावित्री महत्त्व
तिथि अमावस, ज्येष्ठ मास को
वट -सावित्री मनाते हैं
घर की गृह लक्ष्मी भी इस दिन
व्रत का पूजन करती हैं।।
सावित्री की भक्ति -शक्ति भी
ग्रन्थों में उल्लेखित है
महाभारत के वनपर्व में
प्रथम कथा यह मिलती है।।
भद्र देश के अश्वपति राजा
कन्या उनकी सावित्री
द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान
जो थे ज्ञानी और सुशील
सत्यवान को पतिरूप में
सावित्री ने पाया था
एक वर्ष ही शेष बचा है
नारद ने समझाया था।।
राजमहल सब छोड़छाड़कर
पति संग वह रहने लगी
सास- ससुर की सेवा में ही
समय वहीं बिताने लगी।।
सत्यवान की मृत्यु निकट थी
महाप्रयाण का दिन भी था
मन ही मन वह चिंतित थी
सत्यवान संग वन को चली।।
चढ़े वृक्ष पर सत्यवान जब
सिर उनका तब चकराया
पति का सिर गोदी में रखकर
पतिव्रता का साथ दिया।
निकट खड़े थे काले रंग के
हाथ में फाँसी डोर लिए
कौन हो? सावित्री ने पूछा
यमराज हूँ मैं, प्राणहर्ता
सावित्री की सत्यनिष्ठता
अद्भुत और निराली थी
प्राणप्रिये की भक्ति देख
यमराज ने प्राण लौटा दी थी।।
सावित्री -सत्यवान कथा
जन-जन हृदय समा जाए
जग में, कभी न हो हिंसा
मानव अहिंसक हो जाए।।
रचयिता
दीपा पाण्डेय,
प्रवक्ता संस्कृत,
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज काकड़,
विकास खण्ड-बाराकोट,
जनपद-चम्पावत,
उत्तराखण्ड।

your words are amezing
ReplyDeleteबहुत सुंदर
ReplyDeleteहृदय स्पर्शी रचना🎉👍🎉
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