राम प्रसाद बिस्मिल

स्वतंत्रता आंदोलन की धारा का सेनानी,

याद दिला दी जिसने अंग्रेजो को नानी,

30 वर्ष की उम्र में फाँसी का फंदा चूमा,

हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन का सदस्य सेनानी।


11 जून शाहजहांपुर था पवित्र धाम,

जहाँ अवतरित हुए बिस्मिल" राम",

धर्म से हिंदू ब्राह्मण, कवि, साहित्यकार,

बिस्मिल उनका उर्दू तखल्लुस उपनाम।


स्वामी सोमदेव ने बदला जीवन सारा,

देश प्रेम की भावना से महका मन सारा,

काकोरी कांड एक तूफान लाया,

कार्य लिया हाथ पूरा किया बिना इशारा।


ब्रिटिश सरकार थी इनसे हलकान,

गिरफ्तार करने का किया फिर प्लान,

असाधारण प्रतिभा से देशव्यापी संगठन बनाया,

देश की अर्थव्यवस्था में सुधार का किया प्रण।


"जिंदगी का राज" इनकी थी यह ग़ज़ल,

जीवन का वास्तविक अर्थ बताती ग़ज़ल,

19 दिसंबर 1927 गोरखपुर में जीवन का अंत,

आँख नम की सबकी विदा किए बिस्मिल सजल।


रचयिता
नम्रता श्रीवास्तव,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय बड़ेह स्योढ़ा,
विकास खण्ड-महुआ,
जनपद-बाँदा।


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