बाल मजदूर व्यथा
नन्हा मुन्ना राही था, देश का सिपाही था|
बोलता था मैं भी जय हिंद, जय हिंद||
रोज हम काम करें डर-डर के,
अब रोज जीते हैं मर-मर के,
दिन भर करते हैं, मजदूरी हम,
फिर भी ठीक से ना मिले भोजन,
इधर -उधर, इधर -उधर करें काम हम,
थकने के बाद भी सुनें डाँट हम|
नन्हा मुन्ना राही था, देश का सिपाही था|
बोलता था मैं भी जय हिंद, जय हिंद||
सड़क, मिल, फैक्टरी में काम हो जहाँ,
धूप, बारिश, जाड़ा से सुरक्षा है कहाँ,
धरती पर आकर पछता रहे हम,
काम करते-करते निकल जाता दम||
नन्हा-मुन्ना राही था, देश का सिपाही था|
बोलता था मैं भी जय हिन्द, जय हिन्द||
रचयिता
कमलेश प्रसाद वर्मा,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय रिकेबीपुर,
विकास खण्ड-रामपुर,
जनपद-जौनपुर।

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