राम प्रसाद बिस्मिल
आओ बच्चों तुम्हें सुनाएँ,
कहानी वीर महान की।
कवि शायर अनुवादक,
देशभक्त साहित्यकार की।।
गजलों का था शौक इन्हें,
जीवन देशहित त्यागा था।
इस धरती का लाल हूँ मैं,
आजीवन यही माना था।।
राम और अज्ञात नाम से,
कविताएँ वो लिखते थे।
कैसे मिले आजादी देश को,
सपने यह देखा करते थे।।
सरफरोशी की तमन्ना,
दिल में जगा दिए सबकी।
धर्म युद्ध का नाम दिया।
लड़ाई को आजादी की।।
काकोरी षड्यंत्र के नेता,
बुद्धिमान बड़े योग्य थे।
बाँध कफन सर पर अपने,
फाँसी का फंदा चूमे थे।।
रचयिता
ज्योति विश्वकर्मा,
सहायक अध्यापिका,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय जारी भाग 1,
विकास क्षेत्र-बड़ोखर खुर्द,
जनपद-बाँदा।

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