पर्यावरण

एक विचार है मन में आया,

जो है बहुत ही कल्याणकारी।

विकास दौड़ में ऐसे भागे,

प्रकृति का कर दिया नुकसान भारी।


उसी की भरपाई कर रहे हैं,

बिना ऑक्सीजन मर रहे हैं।

पेड़ काटकर सड़क बनाई,

और अब सड़कों पर जाने से डर रहे हैं।


जंगलों को भी काट रहे हैं,

नदियों को भी पाट रहे हैं।

कहीं बाढ़ कहीं भूस्खलन है,

नहीं कर रहा कोई मनन है।


पर्यावरण दिवस की बधाई देकर,

सब पर्यावरण दिवस मना रहे हैं।

पर सोचो क्या हम इस दिवस को,

उचित ढंग से मना रहे हैं? 


अच्छा होता गर इस दिवस को,

पूरे वर्ष भर हम मनाएँ।

वृक्षारोपण करें सतत ही,

और उनको अपना मित्र बनाएँ।


हरी-भरी होगी ये धरती,

स्वच्छ होगा वातावरण।

शुद्ध होंगे हवा और पानी,

सुंदर होगा पर्यावरण।


रचयिता
सीता टम्टा,
प्रधानाध्यापिका,
रा०प्रा०वि० सारेग्वाड़,
संकुल- गैरसैंण,
विकास खण्ड- गैरसैंण,
जनपद- चमोली,
उत्तराखण्ड।



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