सरफरोश
आज मनाएँ जन्मदिवस,
आजादी के मतवाले का।
जो फाँसी का फंदा झूला,
ऐसे एक दिलवाले का।
धन्य हैं माता मूलमती,
जिसने जाया था बिस्मिल।
धन्य है भारत माता भी,
जो भक्त मिला था बिस्मिल।
रास ना आई जिसे गुलामी,
अपनी भारत माता की।
बाँध कफ़न केसरिया सिर पे,
कसम खाई थी माता की।
अशफ़ाक आजाद व राजगुरु,
यार तेरे थे सच्चे।
रग-रग में जिनके जोश बहे,
और थे वादे के पक्के।
यारों संग मिलकर तुमने,
आजादी का बिगुल बजाया।
करके कांड काकोरी तुमने,
अंग्रेजी हुकूमत को दहलाया।
सरफरोश थी तेरी तमन्ना,
और आजादी था सपना।
भारत माँ की बलिवेदी पर,
था शीश चढ़ाया अपना।
अमर रहेगी गाथा तेरी,
अमर रहेगा तेरा नाम।
इतिहास के पन्नों पर सदा,
चमकेगा तेरा नाम।
रचनाकार
सपना,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय उजीतीपुर,
विकास खण्ड-भाग्यनगर,
जनपद-औरैया।

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