डाकिया
बजी ट्रिन ट्रिन
साइकिल की घंटी
भागे राधा सीमा बंटी
जोर-जोर से आवाज लगाते
डाकिया आया सबको सुनाते
हर चेहरे पर खुशियाँ होतीं
पत्र पढ़ो दादी हैं कहतीं
सुख-दुख की खबरें है लाता
डाकिया घर में पत्र दे जाता
गर्मी में पसीने बहा कर
वर्षा में छतरी को तान कर
सर्दी में चप्पल पहन कर
डाकिया सबकी चिट्ठी देकर
खुशी-खुशी घंटी बजाता
देखो डाकिया! घर को जाता
रचयिता
सुनीता बहुगुणा,
सहायक अध्यापक,
राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय बिजनी बड़ी,
विकास क्षेत्र - यमकेश्वर,
जनपद - पौड़ी गढ़वाल,
उत्तराखण्ड।

Nice poem 🎉
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