विश्व समुद्र दिवस

मैं समुद्र हूँ, अनन्त हूँ,

पयोधि, रत्नाकर, नदीश हूँ।

70% भाग पर फैला हूँ,

जलीय जीवों का ईश हूँ।।


मैं समुद्र हूँ, अनन्त हूँ,

खारे पानी का अम्बार हूँ।

समेटे रहस्यों को अन्दर हूँ,

मूँगा, मोती, रत्नों का संसार हूँ।।


मैं समुद्र हूँ, अनन्त हूँ,

जलीय जन्तुओं का वास हूँ।

खौफनाक "सुनामी" लाता हूँ,

फिर भी मछुआरों की आस हूँ।। 


मैं समुद्र हूँ, अनन्त हूँ,

रखे गर्भ के अन्दर पहाड़ हूँ।

100 करोड़ वर्ष पुराना हूँ,

विशाल लहरों की दहाड़ हूँ।।


रचयिता

शालिनी,

सहायक अध्यापक,

प्राथमिक विद्यालय बनी, 

विकास खण्ड-अलीगंज,

जनपद-एटा।

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