वट पूजा
तर्ज-मनिहारे का भेष बनाया
वट पूजा का शुभ दिन आया,
मैंने खुद को खूब सजाया।
माथे पे बिंदिया लाल लगाई,
चूड़ी से भर ली अपनी कलाई।
सिंदूर माँग में लगाया,
मैंने खुद को खूब सजाया।
वट पूजा.........
होठों पे लाली लाल लगाई,
हाथों में मेहंदी सुर्ख रचाई।
काजल आँखों मे लगाया,
मैंने खुद को खूब सजाया।
वट पूजा.........
कानों में कुंडल नाक में नथनी,
पैरों में पायल खूब है बजनी।
गले में है हार सजाया,
मैंने खुद को खूब सजाया।
वट पूजा..........
लाल है लहंगा, लाल है चोली,
सिर पे चुनरी लाल है ओढ़ी।
दुल्हन सा खुद को सजाया,
मैंने खुद को खूब सजाया।
वट पूजा..........
वट वृक्ष की पूजा आज करूँ,
पति के लिए व्रत आज करूँ।
सावित्री माँ को है आज मनाया,
मैंने खुद को खूब सजाया।
वट पूजा..........
मन में श्रद्धा भाव लिए,
हाथों में पूजा थाल लिए।
मैंने रोली पुष्प और जल चढ़ाया,
मैंने खुद को खूब सजाया।
रचनाकार
सपना,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय उजीतीपुर,
विकास खण्ड-भाग्यनगर,
जनपद-औरैया।

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