हरित धरा
कितनी प्यारी यह हरित धरा
सुन्दर-सुन्दर रंग-बिरंगे फूल यहाँ।
अनगिनत औषधियों के भंडार
गगन को छूते हरे-भरे वृक्ष संसार।
वृक्षों पर झूलती रंग-बिरंगी बेल
कलरव करते पक्षी खेलें खेल।
ठंडी-ठंडी पवन के झोंके
बरबस हर पथिक को रोकें।
कलकल बहते ये झरने,
इठलाती बलखाती नदियाँ।
रंग-बिरंगी प्यारी तितलियाँ,
करती हैं फूलों में अठखेलियाँ।
इसी धरा पर जीवन का
ये पावन चक्र चलता जाए,
जीव-जंतु और मनुष्य
सब इसमें आश्रय पाएँ।
बारिश की ठंडी-ठंडी बूँदें
इसका सौंदर्य और बढाएँ
आओ इस धरा को हम
मिलकर और रंगीन बनाएँ।
आओ प्रत्येक जन एक-एक
वृक्ष आज अवश्य लगाएँ।
इस धरा का हम श्रृंगार कर
धरा को दुल्हन सा सजाएँ।
रचयिता
कुमुद धस्माना,
सहायक अध्यापिका,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय नीलकंठ,
विकास खण्ड-यमकेश्वर,
जनपद-पौड़ी गढ़वाल।

बहुत खूब... शानदार सृजन..
ReplyDeleteबधाई व साधुवाद मैम... 👍👌🌺🌹
Nice poem 🎉👍🎉
ReplyDeleteबहुत सुंदर रचना मैम
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