विश्व मातृ दिवस
प्रथम पाठशाला होती है माँ
उसके शिशु के लिए दुनिया में।
उसका बर्ताव और अनुभव ज्ञान
असर डालता है शिशु के जीवन में।।
आज मातृदिवस भले ही अमेरिका में है,
पर सार्वभौमिकता इसकी दुनिया में है।
माँ से पुत्र का नाता अटूट होता है,
नौ माह का रिश्ता भी कितना अजीब है।।
सब ॠण चुका सकते हो तुम,
पर माँ का ॠण चुकाना असंभव है।
तुमको सूखे में कर खुद गीले में,
रात्रि जागरण करना कितना असंभव है।।
तुम्हें खिलाकर खुद भूखे रह जाना,
ऐसा सिर्फ माँ ही कर सकती है।
तुम्हारी खुशियों के लिए एक माँ ही,
सब कुछ न्योछावर कर सकती है।।
आओ संकल्प करें माँ के सम्मान का,
पूजन हो, वन्दन हो और हो अर्चन।
समझ सकें, एहसास भी करें हम,
अवसर आने पर न्योछावर हो तन मन।।
रचयिता
बी0 डी0 सिंह,
सहायक अध्यापक,
कम्पोजिट विद्यालय मदुंरी,
विकास खण्ड-खजुहा,
जनपद-फतेहपुर।

Very nice
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