आम का अचार
पाँच आम खरीद कर,
अम्मा मेरी लाईं जी||
50 टुकड़े कर उनके
धूप में सुखाईं जी||
5 टुकड़े ले चुपचाप,
गुप -चुप, गुप-चुप खाई जी|
पकड़ी गई ऐसा करते,
डाँट तब खूब खाई जी||
तेल-हल्दी-मिर्च मिलाकर,
अम्मा, आम का अचार बनाईं जी|
आलू का परांठा बनाकर,
अचार संग खिलाईं जी||
'खाया अचार', चटकारे लेकर,
मेरी सखियों को भी भाया जी|
खट्ठा-मीठा अचार बनवाकर,
अब मैम को खिलाऊँ जी||
रचयिता
प्रतिभा भारद्वाज,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यामिक विद्यालय वीरपुर छबीलगढ़ी,
विकास खण्ड-जवां,
जनपद-अलीगढ़।

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