रविंद्र नाथ टैगोर
किसी परिचय के नहीं मोहताज हैं टैगोर,
7 मई 1861 को कोलकाता में जन्मे टैगोर,
बचपन में उनको "रबी" बुलाया जाता,
8 वर्ष की उम्र में पहली कविता लिखे टैगोर।
16 साल में कहानियाँ, नाटक लिखना किया प्रारंभ,
विश्व विख्यात कवि, दार्शनिक की साहित्य- साधना आरंभ,
"गुरुदेव" के नाम से उनको पुकारा जाता,
भारतीय सांस्कृतिक चेतना में जान फूँकना प्रारंभ।
दो रचनाएँ, दो देशों का राष्ट्रगान बना,
राष्ट्रगान "जन गण मन" भारत की शान बना,
बांग्लादेश का राष्ट्रीय गान "आमार सोनार बांग्ला" हुआ,
बचपन से ही कविता, छंद, भाषा में रुचि रही।
उपन्यास, निबंध, लघुकथाएँ, यात्रा- वृतांत लिखे,
"चोखेर वाली" "कणिका " शिशु भोलेनाथ लिखे,
"गीतांजलि" के लिए नोबेल पुरस्कार था पाया,
राजा जॉर्ज पंचम ने "नाइटहुड" की पदवी से सम्मान दिया।
जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में पदवी लौटाई,
अंतिम दिनों में चित्र बनाने में रुचि दिखाई,
मोह, क्रांति और निराशा के स्वर हुए प्रकट,
7 अगस्त 1941 को जग से ली विदाई।

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