मेरी माँ
पूजनीय, वंदनीय,अविस्मरणीय है मेरी माॅं ।
दिया आकार जिसने मुझको,
दिखाया संसार जिसने मुझको,
मैं ऋणी हूँ जिसकी, वह है 'मेरी माँ'।।
नहीं हो तुम इस भौतिक संसार में,
पर जीवित हो तुम मेरे संस्कार में,
रोम-रोम में बसी है जो वह है 'मेरी माँ'।।
जननी सम मैं बनूँ यह इच्छा है हमारी,
धन्य हो गई मैं बन दुहिता तुम्हारी,
जीवन को जीना सिखाया जिसने वह 'मेरी माँ'।।
कभी गुरु, कभी सहेली, बन साथ निभाया,
कभी कमी नहीं रही मुझको हर रिश्ता निभाया,
हर पल जिसकी यादों को मैं जीती हूँ वह है 'मेरी माँ'।।
बड़े प्यार से, बड़े जतन से माँ ने पाला मुझको,
बस यही आरजू है कि हर जनम में पाऊँ तुझको,
मिली अनमोल शिक्षा जिससे, वह है 'मेरी माँ'।।
सदा हौंसला बढ़ाया माँ ने हताशा और निराशा में,
कभी नहीं मायूस किया अपने आँचल की छाया में,
हमेशा आगे बढ़ना सिखाया जिसने, वह है 'मेरी माँ'।।
पूजनीय,वन्दनीय, अविस्मरणीय है मेरी माॅं।
रचयिता
प्रतिमा उमराव,
सहायक शिक्षिका,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय अमौली,
विकास खण्ड-अमौली,
जनपद-फतेहपुर।

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