राणा प्रताप
सिसोदिया राजपूत राजवंश के ताप,
नाम है उनका सम्मानित महाराणा प्रताप,
वीरता और दृढ़- प्रण के लिए अमर,
अकबर की अधीनता न स्वीकारे राणा प्रताप।
9 मई 1540 कुंभलगढ़ जगमगाया था,
सिसोदिया कुल में जब नक्षत्र आया था,
कई सालों तक किया मुगलों से संघर्ष,
युद्ध में उन्हें कई बार परास्त किया था।
धन्य हैं पिता महाराणा उदयसिंह,
माँ जयवंता बाई, जो जन्मे ऐसे सिंह,
हल्दीघाटी का युद्ध बना ऐतिहासिक,
रणबाँकुरा था सिसोदिया वंश का सिंह।
भामाशाह के योगदान को कम नहीं माना,
अनुदान उनका, जीवन का वरदान माना,
28 फरवरी 1572 गोगुंदा में प्रथम राज्याभिषेक,
हल्दीघाटी के युद्ध में भील सरदार को मित्र माना।
इतिहासकार मानते हैं कि युद्ध का नहीं था निष्कर्ष,
राणाप्रताप ने किया वीरता से सबको आकर्ष,
राजपूतों ने मुगलों के छक्के छुड़ा दिए,
दोनों पक्षों ने किया धुआँधार संघर्ष।
छापामार नीति अपनाई, पहाड़ियों के लिया सहारा,
वित्तीय सहायता दी भामाशाह ने, वीर ना कभी हारा,
19 जनवरी 1597 जीवन लीला हुई समाप्त,
आचार्य राघवेंद्र का शिष्य रहा सबका दुलारा।

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