प्रकृति के करीब जाना है

तर्ज- दिल का रिश्ता बड़ा ही.........


धरती मांँ को हमें सजाना है,

पर्यावरण दिवस मनाना है।

प्रकृति के करीब जाना है,

हम तो एक-दूसरे के पूरक हैं।

हम तो एक-दूसरे के पूरक हैं,

मानता ये जहान सारा है।

धरती माँ को हमें सजाना है।।


प्रचुर ऑक्सीजन देने वाले, 

प्रचुर ऑक्सीजन देने वाले।

प्राणवायु हमें देने वाले,

पेड़-पौधे हमें लगाना है।

पेड़-पौधे हमें लगाना है,

प्रकृति के करीब जाना है।

धरती माँ को सजाना है।।


मुझको बख्शी ये जिंदगी तुमने, 

मुझको बख्शी ये जिंदगी तुमने।

साँसों को दी संजीवनी तुमने,

इसका ऋण भी हमें चुकाना है।

इसका ऋण भी हमें चुकाना है,

प्रकृति के करीब जाना है।

धरती माँ को हमें सजाना है।।


हँसती मुस्कराती सी मिले धरती, 

जगमगाती सी जिंदगी अपनी।

आपदा ना पड़े कोई भारी,

इसमें भी तो करम हमारा है।

इसमें भी तो करम हमारा है,

प्रकृति के करीब जाना है।

धरती माँ को हमें सजाना है।।


प्रकृति के करीब जाना है,

धरती माँ को हमें सजाना है।

पर्यावरण दिवस मनाना है,

प्रकृति के करीब जाना है।

धरती माँ को हमें सजाना है।।


रचयिता
सुमन पांडेय,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय टिकरी मनौटी,
शिक्षा क्षेत्र -खजुहा,

जनपद-फतेहपुर।


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