तब होता स्वच्छ पर्यावरण

    प्रकृति का रूप मनोहर

    कहीं नग कहीं शांत सरोवर

      रंग-बिरंगे फूल खिले हैं

       लगता है ज्यों गले मिले हैं

      जब   हरियाली का हरित आवरण

         तब होता स्वच्छ पर्यावरण

आकर्षक जब पक्षी ये सब

     नभ में विचरण करते जाते

सार्थक उड़ान भरलो हरदम

     यह संदेश देते जाते

इनका जब हम करें संवर्धन

        तब होता स्वच्छ पर्यावरण।

छोटे- बड़े जीव- जंतु जब

       करते रहते अपना काम

मुग्ध होतीं सभी दिशाएँ

      रंगभरी तब होती शाम

 सबका होता जब संरक्षण

       तब होता स्वच्छ पर्यावरण.. 

सरिताओं का जल जब ऐसे

   बहता जाता कल-कल, छल-छल

 पशुओं के ये छोटे बच्चे

       दौड़ लगाते निर्भय, निश्छल

जब हो ऐसा सुंदर आवरण

       तब होता स्वच्छ पर्यावरण।।

भाँति- भाँति के ये विटप हमारे

      हम हैं भिक्षुक, ये हैं दानी

देते रहते हमें निरंतर

     धड़कन, आश्रय, दाना-पानी

करें जब मिलकर इनका रोपण

      तब होता स्वच्छ पर्यावरण।।

वातावरण को स्वच्छ बनाएँ

      सार्थक, सरल जीवन अपनाएँ

अधिकाधिक सब वृक्ष लगाएँ

      महामारी को समूल भगाएँ

सजें धरा के जब आभूषण

    तब होता स्वच्छ पर्यावरण।

     

रचयिता

गीता जोशी, 
सहायक अध्यापक,
राजकीय कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय जैनौली, 
विकास खण्ड-ताड़ीखेत, 
जनपद-अल्मोड़ा,
उत्तराखण्ड।





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