वाक्यांश के लिए एक शब्द

आओ हम सब सीखेंगे, वाक्यांश के लिए एक शब्द।
पल भर में हो जाएँगे, इतने सारे याद शब्द।।

जो रखे ईश्वर में आस्था, वह कहलाता आस्तिक।
जो न माने ईश्वर को, वह बन जाता नास्तिक।।

वाणी संबंधी वाचिक कहलाता, ईश्वर संबंधी आध्यात्मिक।
इतिहास संबंधी ऐतिहासिक होता, वेतन बिना अवैतनिक।।

खोज करने वाला अन्वेषक, दूसरों को पाले परपोषक।
रोग लगे जो एक से दूसरे को, वह कहलाता संक्रामक।।

जिसकी होती बहुत ही चर्चा, वह बन जाता बहुचर्चित।
जीत लिया गया हो जिसको, वह हो जाता विजित।।

पहले जिसको नहीं पढ़ा, वह कहलाता अपठित।
आशा जिसकी की न जाए, वह होता अप्रत्याशित।।

पाप करके स्वयं हो दंडित, कहलाता है प्रायश्चित।
जो रहते एक दूसरे पर आश्रित, वे होते अन्योन्याश्रित।।

दोपहर से पूर्व का समय पूर्वाह्न और बाद का अपराह्न।
चला आ रहा सदियों से जो, वह कहलाता सनातन।।

ना कोई आकार हो जिसका, वह कहलाता निराकार।।
नहीं जिसका आधार हो कोई, वही होता निराधार।।

नई चीज की खोज करना, बन जाता आविष्कार।
हृदय जिसका हो विशाल, वह कहलाता है उदार।।

जो न दिखाई दे किसी को, वह होता अदृश्य।
क्षमा करने योग्य नहीं जो, वह कहलाता अक्षम्य।।

जिसका नहीं कोई उद्देश्य, वही होता निरुद्देश्य।
मूल्य जिसका न आँका जाए, वह कहलाए अमूल्य।।

जिसका ना हो कोई आदि, वह तो होता अनादि।
जो बोले सत्य हमेशा, वह बन जाता सत्यवादी।।

जिसको सब कुछ होता ज्ञात, वह कहलाता सर्वज्ञ।
जो माने उपकार को, वह हो जाता कृतज्ञ।।

जो है कम जानता, वह कहलाता अल्पज्ञ।
जो कुछ भी नहीं जानता, रह जाता वह अज्ञ।।

भूमि जो अनुपजाऊ हो, वह कहलाती ऊसर।
जो होती उपजाऊ भूमि, वह बन जाती उर्वर।।

मर कर भी जो ना मरे, वह हो जाता अमर।
जो कभी ना बूढ़ा हो, वह कहलाता अजर।।

रचयिता
ऋतु सिंघल,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय अंबेहटा चांद-1,
विकास खण्ड- रामपुर मनिहारान,
जनपद- सहारनपुर।

Comments

Post a Comment

Total Pageviews