प्राइमरी शिक्षक

'अ' का ज्ञान कराकर के,
अज्ञानता को मिटाते हैं।
हम प्राइमरी के शिक्षक हैं,
मरुभूमि में सुमन खिलाते हैं।

परिस्थितियाँ किंचित अनुकूल नहीं,
हम जोश से सफर बढ़ाते हैं।
जो है साधनविहीन और अपवंचित,
मनोयोग से उन्हें पढ़ाते हैं।

दुर्गम अंचल से शहरों तक,
हम शिक्षा की अलख जगाते है।
अपनी तकनीकी और नवाचार से,
कॉन्वेंट से भी दृष्टि मिलाते हैं।

हर कार्य सफलीभूत करें,
शासन के हों या समाज के।
स्वर्णिम भविष्य के सूत्रपात को,
हम पथ प्रदर्शक हैं आज के।

इस महामारी के काल में भी,
बन योद्धा कार्य जारी है।
क्वारंटीन सेंटर हो या राशन वितरण
आगे अभी बड़ी तैयारी है।

कर्तव्य पथ पे चल कर के,
कई साथी नश्वर जग से दूर गए।
'अनुराग, धारणा अब तो बदलो,
 हर कार्य हमारे भूल गए।

रचयिता
डॉ0 अनुराग पाण्डेय,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय औरोतहरपुर,
विकास खण्ड-ककवन,
जनपद-कानपुर नगर।

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